Sunday, 23 March 2014

सहनशीलता का महत्व













सहनशीलता का महत्व 

जब मैं अंदर से शान्त हँू तो ही सहनशक्ति की गुंजाईश है। जहाँ प्यार है वहाँ खुलापन है, जहाँ खुलापन है वहाँ सहनशीलता के लिए स्थान है। कहा जाता है कि सहनशील व्यक्ति कमजोर होते हैं जबकि सबसे महान व्यक्ति अपनी सहनशीलता से ही जाने जाते हैं। सहनशीलता एक वॉटर टैन्क के समान है। हरेक का अपना वॉटर टैन्क है और वह उसे अपनी धैर्यता के पानी से भरने का जिम्मेवार है। धैर्यता के इस पानी से जब वॉटर टैन्क ओवरफ्लो हो जाता है तो सहनशक्ति भी अधिक हो जाती है। ज्यादातर लोग यह सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि वे सही हैं और दूसरे गलत हैं। एक सहनशील व्यक्ति को कभी भी कुछ भी साबित करने की आवश्यकता नहीं है। एक पुरानी कहावत है कि सच्चाई हमेशा बाहर आ जाती है। अगर मैं ऐसा समझता हँू तो ये भी स्वीकार करूंगा कि दूसरे भी सही हैं। अत: मुझे अपनी सोच को दूसरों के प्रति बदलना चाहिए और उनके प्रति ज्यादा स्नेही, दयालू और समझदार होना चाहिए।

सहनशक्ति का आधार बनावटी बातों से परे जाना है। हम अपने बुरे अनुभवों के लिए दूसरों को दोष देते हैं जबकि हमें अपने अंदर झांक कर स्वयं को जानना होता है। मैं क्रोधी हँू, जब मैं यह स्वीकार कर लेती हँू तो मैं सहनशील हँू और तभी से सब बातें बदलने लगती है।
मुझे नि:स्वार्थ दूसरों की आवश्यकताओं के प्रति ध्यान देना चाहिए तभी मैं सब बातों को संभाल सकती हँू। हम प्राय: कहते है कि मुझे समझने की जरूरत है परन्तु मुझे कहना चाहिए कि मुझे दूसरों को समझने की आवश्यकता है। यह कहना बंद करो, वो बदले, बल्कि मुझे स्वयं को बदलने की जरूरत है। ऐसी सोच से धैर्य, शान्ति और परिपक्वता का विकास होता है। आध्यात्मिक सहनशीलता से ही ऐसी बुद्धिमत्ता का विकास होता है जिसे आप पुस्तकों से प्राप्त नहीं कर सकते। सहनशील व्यक्ति, विषम परिस्थितियों को शान्तिपूर्ण तरीके से हल कर लेते हैं। जब कोई मेरा अपमान करता है तो सहनशक्ति मुझे स्थिर और शीतल रहने की शक्ति प्रदान करती है। मुझे रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं पड़ती। अपितु, मुझे मुस्कुराते हुए अपने स्वमान में रहना होता है जो मुझे परिस्थितियों से परे ले जाने में सहायक होती हैं। सहनशील व्यक्ति सभी को अपने साथ लेकर चलते है, तालमेल बिठाते और परिस्थितियों का सामना करते हैं। वे संसार में होने वाली घटनाओं को अपने ऊपर उठने का एक अवसर मानते हैं। ये सहनशक्ति, आंतरिक शक्ति एवं अखंडता से आती है। सहनशक्ति दूसरों के प्रति उदार और खुला होने का अनुभव मात्र है। जब आप ये देखते हैं कि आपके संबंध और ताल्लुकात अच्छे हैं तो आप विशेष रूप से सहनशक्ति का उपयोग करते हैं। आध्यात्मिक शक्ति इस समझ से आती है कि आप कौन हैं, और आप मूल्यों के आधार पर खड़े हुए हैं और आप में सत्यता है, चाहे चारों ओर की परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
खुले, प्यार भरे और उदार हृदय द्वारा मुझमें समाने की शक्ति आती है। समाने, सहन करने से शान्ति की स्थिति से विकट परिस्थितियाँ भी आसान हो जाती हैं। सहनशीलता हमारा आंतरिक भोजन है। यदि मैं कहता हँू कि मुझे सहन करना पड़ेगा, इसका अर्थ है कि वास्तव में मुझमें सहनशक्ति नहीं हैं। जब मैं किसी स्थिति, परिस्थिति और व्यक्ति से प्यार का व्यवहार करता हँू तो मेरे में सहन करने की कोई फीलिंग नहीं होती।
सहनशील व्यक्ति ईंट की दीवार के समान होता है। उनका किसी से कितना भी टकराव हो फिर भी वे मजबूत, सुरक्षित और सर्वस्नेही रहते हैं और यह सब समाने और स्वीकार करने से होता है। एक पेपर टावल पानी को सोखने और समाने की शक्ति रखता है। बाग और खेत मौसम को सहन करने की क्षमता रखते हंै। क्या हम इन सबको सहन करते हुए मुस्कुराते हुए कह सकते हैं कि नि:संदेह, हाँ हम एकरस स्थिति में रह सकते हैं। विल पावर व दृढ़ता की शक्ति से हम पहाड़ों को भी पार कर सकते हैं।
हम सब जीवंत मानव वृक्ष हैं, जो चारों सीजन से गुजरते हैं, प्रत्येक की सहन करने की शक्ति भिन्न हैं। आंतरिक शक्ति समझदारी से आती है, लेकिन जब मैं साक्षी होकर देखता हँू तो मुझे लगता है कि मैं सहन नहीं कर रहा हँू परन्तु मैं बड़े और उदार दिल से दूसरों को स्वीकार कर रहा हँू और मेरी ओर आने वाली सब बातों को मैं समा रहा हँू। जब मैं सागर के समान बनता हँू तो आने वाली सभी बातों को खुली बाहों से अपने में समा लेता हँू फिर मेरा जीवन सुखमय, सहज हो जाता है और संबंध खुशनुमा हो जाते हैं। जब मैं उसका विरोध करता हँू तो समस्याएं पैदा हो जाती हैं और बढ़ भी जाती है। जब मैं गहराई से सोचता हँू कि सहनशीलता मेरा पुराना साथी है और धैर्य मेरा मित्र है, तो ये दोनों सारा दिन मेरे सभी पलों में मेरे साये के समान रहते है और जहाँ मैं जाता हँू वहाँ ये मेरे साथ जाते है।
सहनशीलता एक डांस की तरह है जिसमें हर समय सही काम अंदर-बाहर करना होता है। मैं हर एक बात को किस प्रकार सहन करता हूँ और कैसा संबंध रखता हूँ इसके लिए हर क्षण डांस टेक्निक की मेरे जीवन में आवश्यकता होती है, कभी जल्दी-जल्दी तो कभी धीरे-धीरे डांस करना पड़ता है।
फूल कांटों में रहते हुए भी हमेशा खिलते हैं, इसी प्रकार मुझे इस संसार में रहते हुए भी मेरे चारों ओर के लोगों को किस प्रकार से रेस्पाण्ड करना है और उन्हें स्वीकार वा एडजेस्ट करना है यह सहनशीलता का लक्षण है इसलिए सहनशीलता यह एक शक्ति है न कि कमजोरी। यह तूफान में भी वीरान है और गुफा के अंदर अंधेरे में रोशनी है। सहनशक्ति से मुझ में और शक्ति अनुभव होती है। हर अनुभव मेरे जीवन का अमूल्य क्षण है।
कभी कभी मुझे और उदासीनता अनुभव होती है जो दोनों ही निगेटिव क्वालिटीज़ हैं। अगर हम सहनशील नहीं हैं तो हम अपने को खाली अनुभव करते हैं। हमारे में सहनशक्ति नहीं है तो हम दूसरों को दोष देना और रिएक्ट करना शुरू कर देते हैं और जब हम स्वीकार करना शुरू कर देते और स्वयं को शक्तियों से भरपूर कर लेते हैं तो हमारी सहनशीलता पुन: बढ़ जाती है। कठिन परिस्थितियां हमारे लिए दर्पण के समान हैं जिसमें हम अपना वास्तविक रूप देखते हैं। मेरी जिम्मेवारी यथा सम्भव सर्वोत्तम तरीके से रेसपाण्ड करने की है। एक फलों से लदे हुए वृक्ष की कल्पना करो जिस पर एक बच्चा फल लेने के लिए पत्थर फेंक रहा है। वृक्ष उस लड़के से व्यथित नहीं होता है परन्तु किसी भी तरह से उसे फल देता है। हमें ऐसा ही सहनशील बनना है जिससे हमारा जीवन निश्चित रूप से खुशनुमा हो जायेगा। जहाँ स्नेह और प्यार है वहाँ सहनशक्ति स्वत: आती है।
योग के समय कुछ बातें गहराई से सोचने की हैं जिससे हमारी सहनशक्ति बढ़े…
सहनशीलता एक सहमति है…
सहनशक्ति से जीवन में आन्तरिक शक्ति आती है….
सहनशक्ति से जीवन में शान्ति आती है
सहनशक्ति से जीवन में खुलापन आता है
सहनशक्ति से संबंधों में सामंजस्य आता है
सहनशक्ति से स्वयं में, दूसरों में और वातावरण में शक्ति आती है
सहनशील व्यक्ति यह नहीं समझता कि मैं स्वीकार कर रहा हूँ ।
सहनशील व्यक्ति के मित्र अधिक होते हैं क्योंकि वे उसके सानिध्य में स्वयं को सुरक्षित अनुभव करते हैं। सहनशक्ति और रहम साथ-साथ चलते हैं, ये तीनों अच्छे दोस्त हैं और एक दूसरे के प्रति वफादार हैं। सहनशक्ति का अर्थ है मैं जिम्मेवार हूँ।

Monday, 20 January 2014

नैतिक मूल्यों

नैतिक शिक्षा से ही सर्वागीण विकास

Sat, 11 Jan 2014 09:24 PM (IST)
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नैतिक शिक्षा से ही सर्वागीण विकास
बोकारो : एमजीएम सीनियर सेकेंड्री स्कूल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का मूल कारण है।
कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, असत्य से सत्य मार्ग पर ले जाए और बंधनों से मुक्ति दिलाए, वास्तव में वही ज्ञान है। यदि अपराधमुक्त समाज चाहिए तो मानवीय मूल्यों, नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को संस्कारित करना होगा। हमारी विरासत हमारे मूल्यों में है। मूल्य की संस्कृति के कारण आज भारत की पहचान पूरे विश्व में है।
इसके पूर्व प्राचार्य फादर जैकब थॉमस ने आगंतुकों का स्वागत किया। कहा कि बच्चों को नैतिक शिक्षा के माध्यम से संस्कारित करने का काम किया जा रहा है। शैलेश भाई एवं फादर बीनोज ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूनम झा ने किया। मौके पर बीके तेजप्रताप, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

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नैतिक शिक्षा से ही सर्वागीण विकास
बोकारो : एमजीएम सीनियर सेकेंड्री स्कूल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का मूल कारण है।
कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, असत्य से सत्य मार्ग पर ले जाए और बंधनों से मुक्ति दिलाए, वास्तव में वही ज्ञान है। यदि अपराधमुक्त समाज चाहिए तो मानवीय मूल्यों, नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को संस्कारित करना होगा। हमारी विरासत हमारे मूल्यों में है। मूल्य की संस्कृति के कारण आज भारत की पहचान पूरे विश्व में है।
इसके पूर्व प्राचार्य फादर जैकब थॉमस ने आगंतुकों का स्वागत किया। कहा कि बच्चों को नैतिक शिक्षा के माध्यम से संस्कारित करने का काम किया जा रहा है। शैलेश भाई एवं फादर बीनोज ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूनम झा ने किया। मौके पर बीके तेजप्रताप, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

नैतिक शिक्षा की आवश्यकता

: एमजीएम सीनियर सेकेंड्री स्कूल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए
नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का मूल कारण है।
कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, असत्य से सत्य मार्ग पर ले जाए और बंधनों से मुक्ति दिलाए, वास्तव में वही ज्ञान है। यदि अपराधमुक्त समाज चाहिए तो मानवीय मूल्यों, नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को संस्कारित करना होगा। हमारी विरासत हमारे मूल्यों में है। मूल्य की संस्कृति के कारण आज भारत की पहचान पूरे विश्व में है।
इसके पूर्व प्राचार्य फादर जैकब थॉमस ने आगंतुकों का स्वागत किया। कहा कि बच्चों को नैतिक शिक्षा के माध्यम से संस्कारित करने का काम किया जा रहा है। शैलेश भाई एवं फादर बीनोज ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूनम झा ने किया। मौके पर बीके तेजप्रताप, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू

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नैतिक मूल्यो से सर्वांगीण विकाश - भगवन भाई

नैतिक मूल्यो से सर्वांगीण विकाश - भगवन भाई 
चिरकुंडा ०८ जनुअरी :- बचो के सर्वांगीण विकाश के लिये भौतिक शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा कि भी आवशकता है। नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकाश सम्भब है। उक्त उडगर प्रजापिता ब्रम्हा  कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट अबु राजस्थान से प्रधार हुए राज योगी ब्रम्हा कुमार  भगवन भाई  कहे। वे बुधवार को साहू कॉलेज और कुमारधुबी हाई स्कूल के छात्र - छात्रो" शिकचको  कि जीवन में नैतिक शिक्षा  का महत्व" विषय पर छात्रो को सम्बोधित करते हुये बोल रहे  थे। भगवन भाई ने कहा कि शेक्षाक्निक जगत में विदार्थीओ के लिए नैतिक मूल्य  को जीवन में धारण करने कि प्रेरणा देना आज कि आवस्यकता है।  उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यो कि कमी येही वक्तिगत सामाजिक पारिवारिक राष्ट्रीय एवांग  अंतररास्ट्रीय सर्व समश्याओं का मूल कारन है।  विद्यार्थियो का मूल्याङ्कन , आचरण , अनुशरण , लेखन - बेवहारिक ज्ञान एवअंग अन्य बातो के लिए प्रेरणा देने कि आवशकता है।  ज्ञान कि बैख करते हुए उन्होंने बताया कि जो शिक्चा विद्यार्थियो को अंधकार से प्रकाश कि और असत्य से सत्य कि और बंधनो से मुक्ति कि और ले जाए वही शिक्चा है।  उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त समझ के लिए शंकरित शिक्चा जरुरी है। 

                      गुणवान बच्चे देश कि संपत्ति है 
भगवन भाई ने कहा कि आज कि बच्चे कल का भावी सकमज है।  अगर कल के भावी समाज को बेहतर बनाना चाहते हो तो स्कूल के माध्यमो से इन्ही बच्चो को नैतिक सद्गुणो कि शिक्चा कि अधर से चरितवन बनाए।  तब समझ बेहतर बन सकता है गुणवान व चरितवन बच्चे देश कि सच्ची संपत्ति है।  उन्होंने बताया कि एसे गुणवान और चरितवन बच्चे देश और समाज के लिए कुछ रचनात्मक कर्ज कर सकते है। 
उन्होंने भारतीय संस्कृति को याद दिलाते हुए कहा कि प्राचीन सांस्कृति आध्यात्मिकता कि रही जिस कारन प्राचीन मानव भी बंदनीय है और पूजनीय रहा।  उन्होंने बताया कि नैतिक शिक्चा से ही मानव के बेभर में निखार अत है। 
                        कुसंग  , सिनेमा , वेसन फर्शों से युवा भटके 
ब्रह्माकुमार भगवन भाई ने कहा कि वर्त्तमान समय कुषाणग , सिनेमा , व्यशन और फैशन से युवा पिरि भटक रही है।  अध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के दयारा युवा पिरि को नै दिशा मिल सकती है।  उन्होंने बताया कि सिनेमा , इंटरनेट व टीवी कि माध्यम से युवा पिरि पर पश्चात सांकृति का आघात हो रहा है।  इस आघात से युवा पिरि को बचने कि आवश्यता है।  उन्होंने बताया कि युवा पिरि को कुछ रचनात्मक कर्ज सिखाए तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे। बरिष्ट राजयोगी ब्रह्मा कुमार भगवन भाई ने कहा कि हमारे मूल्य हमारी विरासत है।  मूल्य कि संस्कृति के कारन आज भारत कि विषय में पहचान है।  इसलिए नैतिक मूल्य , मानवीय मूल्य़ो कि के लिए सभी को सामूहिक रूप में प्रयास करना चाहिए।  उन्होंने कहा कि मनुष्यो कि सोच ही उसके कर्मो का अधर बनता है इसकिये हमे अपने कर्मो पर ध्यान देना चाहिए कि हमारे कर्म विषय के लिए हितकारी हो। 
सकारात्मक चिंतन का महत्य बताते हुए उन्होंने कहा कि सकारात्मक चिंत्तन से समाज में मूल्यो कि खुश्बू फैलते है।  सकारात्मक चिंतन से जीवन कि हर समस्याओ का समाधान होता है।  उन्होंने शिक्षा का मूल उद्देश बताते हुए कहा कि चरितवन , गुणवान बनना ही शिक्षा का उद्द्येश है।  उन्होंने अड्यात्मिकता को मूल्यो का स्रोत बताते हुए कहा कि शांति, एकाग्रता , ईमानदारी , ध्यराजता , सहनशीलता अदि सद्गुण मानव जाती का श्रीनगर है ,
शतानी ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवा केंद्र कि बक अनीता बहिन ने अपना उद्बोध देता हुए कहा कि कुशांग , सिनेमा , वसंह और फैशन से वर्त्तमान युवा पिरि भटक रही है।  चरितवन बन्ने के किये युवा को इसीसे दूर रहना है।  अपराध मुक्त समाज के लिए चरितवन बनो।  उन्होंने राज योग का महत्व बताते हुए कहा कि राजयोग से एकहराता आयेगी।  
प्रधनाचार्य र बी साहू ने अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि वर्त्तमान समय बच्चो को नैतिक शिक्षा दयारा चरितवन बनाने कि बहुत अवस्ता है।  उन्होंने ब्रह्मा कुमार भगवन भाई का स्वागत किया।  प्रधानाचार्य मिश्रा जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।  इस कर्ज करम में ब क पिंकी  , बी क सुनीता , रघुपति भाई अदि उपश्थित थे 

नैतिक शिक्षा से ही सर्वागीण विकास


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नैतिक शिक्षा से ही सर्वागीण विकास
बोकारो : एमजीएम सीनियर सेकेंड्री स्कूल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का मूल कारण है।
कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, असत्य से सत्य मार्ग पर ले जाए और बंधनों से मुक्ति दिलाए, वास्तव में वही ज्ञान है। यदि अपराधमुक्त समाज चाहिए तो मानवीय मूल्यों, नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को संस्कारित करना होगा। हमारी विरासत हमारे मूल्यों में है। मूल्य की संस्कृति के कारण आज भारत की पहचान पूरे विश्व में है।
इसके पूर्व प्राचार्य फादर जैकब थॉमस ने आगंतुकों का स्वागत किया। कहा कि बच्चों को नैतिक शिक्षा के माध्यम से संस्कारित करने का काम किया जा रहा है। शैलेश भाई एवं फादर बीनोज ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पूनम झा ने किया। मौके पर बीके तेजप्रताप, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।