5000 स्कूल कॉलेजो में और 800 जेलों कारागृह में नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया है जिससे इनका नाम इंडिया बुक रिकार्ड में दर्ज है ब्रह्माकुमारीज़ माउंट आबू में ईश्वरीय सेवा में 35 वर्षो से समर्पित है.
Saturday, 20 August 2016
सकारात्मक से दूर होता है तनाव : भगवान भाई
सकारात्मक से दूर होता है तनाव : भगवान भाई
वर्तमान समय जितनी भी समस्या हैं उन सबका कारण है नकारात्मक सोच। नकारात्मक सोच से तनाव बढ़ता है। तनाव मुक्त बनने के लिए सकारात्मक विचार संजीवनी बूटी है। सकारात्मक विचार से ही मुक्ति संभव है।
यह बातें प्रजापिता ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट आबू राजस्थान से आए राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने कहीं। गुरुवार को स्थानीय सेवा केंद्र पर एकत्रित ईश्वर प्रेमियों को सकारात्मक विचारों से तनाव मुक्ति विषय पर संबोधित किया। भगवान भाई ने कहा कि 19वीं सदी तर्क की थी, 20वीं सदी प्रगति की रही और 21वीं सदी तनाव पूर्ण होगी। ऐसे तनावपूर्ण परिस्थितियों में तनाव से मुक्त होने सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि मन में लगातार चलने वाले नकारात्मक विचारों से दिमाग में विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ उतरकर शरीर में आ जाते हैं। इनसे अनेक बीमारियां होती हैं। मन के नकारात्मक विचारों से मनोबल, आत्मबल कमजोर बन जाता है।
समाज शिल्पी हैं शिक्षक-भगवान भाई
समाज शिल्पी हैं शिक्षक-भगवान भाई
समाज को सुधारने के लिए आदर्श की आवश्यकता उक्त उद्गार प्रजापति बह्मकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालयमांऊट आबू से पधारे राजयोगी बह्मकुमार भगवान जिला शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र में भावी शिक्षक एवं प्रशिक्षणार्थीशिक्षकों को आदर्श शिक्षक वर्तमान के छात्र भावी समाज हैं, अगर भावी समाज को आदर्श बनाना चाहते हो तो छात्राओंको भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बिगड़ती परिस्थिति को देखते हुए समाज को सुधारने की बहुत आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा किशिक्षक वही है जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा देता है। धारणाओं से वाणी, कर्म, व्यवहार औरव्यक्तित्व में निखार आ जाता है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी अगर बच्चे बिग$ड रहे हैं उसकामतलब मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक के अंदर के जो संस्कार है उनका विद्यार्थी अनुकरणकरते हे। । शिक्षकेां को केवल पाठ प$ढाने वाला शिक्षक बनना है। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदरसद्गुण होना आवश्यक है। शिक्षा मेें भौतिक सुधार तो है लेकिन नैतिकता का हृास होता जा रहा है। उन्होंने बताया किअपने जीवन की धारणाओं के आधार से नैतिक पाठ भी आवश्यक पढाये। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षकों के हावभाव उठना, बोलना, चलना, व्यवहार करना इन बातो का असर भी बच्चों के जीवन में प$ढता है। उन्होंने कहा कि जबसमाज को शिक्षित करने व शिखा देने के स्वरूप को बदलने की आवश्यकता है, स्वयं के आचारण से शिक्षा देने कीआवश्यकता है।
स्थानीयबी के रामकृष्ण सीनियर राजयोगी भाई कोयल नगर राउरकेला ओड़िसा कहना है कि एक दीपक सेपूरा कमरा प्रकाशमान होता है तो क्या पूरे जिले को मूल्य निष्ठ शिक्षा से प्रकाशित हम सब मिलकर नहीं कर सकतेहैं? अब आवश्यकता है सेवाभाव की। उन्होंने कहा कि आचरण की शिक्षा जबान में भी तेज होती है। प्रधानचर्या --श्रीमति मरियम डुंग डुंग ने कहा कि परिवर्तन करने की जिम्मेवारी शिक्षकों की है, शिक्षकों को स्वयं को आचरणपर ध्यान देने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ तनाव मुक्त रहने की आवश्यकता है। उन्हेांने बह्मकुमारीद्वारा चलाये जा रहे इस अभियान की सराहना की ।
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