Saturday, 5 January 2013

सकारात्मक विचाराने तणावमुक्ती : भगवानभाई

सकारात्मक विचाराने तणावमुक्ती : भगवानभाई
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BK Bhagwan Bhai
12:10 PM (6 hours ago)

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तभा वृत्तसेवा
गोंदिया, ९ ऑक्टोबर
१९ व्या शतकात अंदाजपूर्वक
होती, २० वे शतक प्रगतीशिल होते.
परंतु, आता २१ व्या शतकात युग हे
तणावपूर्वक राहील. अशा तणावपूर्ण
परिस्थितीत स्वतःला तणावापासून दूर
ठेवण्यासाठी सकरात्मक विचारांची
गरज आहे. आजघडीच्या समस्यामयी
युगात आपल्याला तणावमुक्त
ठेवण्यासाठी सकारात्मक विचाराने
तणावमुक्ती मिळेल, असे प्रतिपादन
प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय
विश्वविद्यालय माऊंट अबू येथून
आलेले राजयोगी बी. के. भगवानभाई
यांनी केले. ते स्थानिक ब्रह्मकुमारी
राजयोग केंद्रात आयोजित कार्यक्रमात
मार्गदर्शन करताना भगवानभाई तर मंचावर उपस्थितांमध्ये
त्रिलोक बग्गा व अन्य
बोलत होते.
पुढे बोलताना भगवानभाई यांनी
सांगितले की, सकारात्मक विचार
करणाराच मानसिक, शारीरिक रुपाने
निरोगी राहू शकतो. नकारात्मक
विचारच अनेक समस्या आणि
आजाराचे कारण बनत असतात. आज
वर्तमानकाळात सहनशक्तीची अत्यंत
आवश्यकता आहे. कोणतेही दुःख,
कष्ट सहन करणे फार कठीण असते
परंतु, त्याचा शेवट हा गोड असतो.
महापुरुषांनी आपल्या सहनशक्तीच्या
आधारावर महानता प्राप्त केली आहे.
गीतेत दिलेले महाकाव्यात असे
सांगितलेले आहे की, जीवनातील
प्रत्येक घटना ही कल्याणकारी आहे. ही
घटना होऊन गेली, ती कल्याणकारी
होती. जी घटना वर्तमान काळात घडत
आहे ती देखील कल्याणकारीच आहे.
जे काही होणार त्यात कल्याणच
होणार, मग चिता किवा तणाव
करण्याची काय आवश्यकता. दुसरयाचे
अहित करणारा व्यक्ती कधीही सुखी
राहू शकत नाही. न्यूटनच्या गतीच्या
नियमाबाबत सांगताना म्हणाले की,
एखाद्या व्यक्तीने आपल्यासोबत
चूकीचा व्यवहार केल्यास आपणही
त्यासोबत तसाच व्यवहार करू नये.
मानवी मूल्यांची कमतरता हीच
सामाजिक, कौटुंबिक, आर्थिक व
पर्यावरणाच्या मूळ समस्यांचे कारण
आहे. भविष्याच्या नाजुक वेळी
स्वतःला सुखी बनविण्यासाठी
सकारात्मक विचारांची आवश्यकता
आहे. सत्संगाच्या माध्यमातूनच आपण
सकारात्मक विचारांनाच आपले बनवू
शकतो.
सत्संगातून मिळालेले ज्ञान हीच
आपली खरी कमाई असते. जीवनात
येणारया अडचणीच्या वेळी पुण्यकर्मच
आपल्याला मदत करीत असते.
यावेळी ब्रह्मकुमारी राजयोग केंद्राच्या
संचालिका ब्रह्मकुमारी रत्नमाला बहन
यांनी राजयोगाचे महत्त्व समजावून
सांगितले. यावेळी प्रामुख्याने
त्रिलोकचंद बग्गा उपस्थित होते.
सकारात्मक विचाराने तणावमुक्ती :
भगवानभाई

Thursday, 3 January 2013

KHANI


शिवजी कैलाश पर्वत पर रहते थे। एक दिन सभी देवताओं ने निर्णय लिया कि हम सभी कैलाश पर्वत पर जाकर शिवजी से मानव जाति की भलाई-बुराई के विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
सभी देवी-देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर कैलाश पर्वत पहुंचे। विष्णु भगवान भी अपने वाहन गरुड पर सवार होकर आए। गरुड ने देखा कि कैलाश पर्वत के मुख्य द्वार पर एक छोटी चिडिया बैठी हुई है और वह कोई मीठा गाना गा रही है। उसके गाने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद देकर अंदर जा रहे थे।
गरुड को भी चिडिया का गाना पसंद आया। उसने भी उसे आशीर्वाद दिया। तभी मृत्यु देवता यम भैंस पर सवार होकर सबसे अंत में पहुंचे। उन्होंने भी चिडिया का गाना सुना, लेकिन उन्हें वह गाना पसंद नहीं आया। वे नाराज हो गए। उन्होंने क्रोधित नजरों से चिडिया को देखा और फिर अंदर चले गए।
गरुड हैरान हुए कि यमराज को गाना क्यों पसंद नहीं आया? और वे नाराज भी हुए, ऐसा लगता है कि वे इस चिडिया को मार डालेंगे। उनके मन में चिडिया के प्रति दया पैदा हो गई। उन्होंने तय किया कि अब मैं चिडिया को यम की दृष्टि से बचाऊंगा। इसके बाद गरुड उस चिडिया को अपने पंखों के नीचे दबाकर उडते हुए सात पहाडों एवं नदियों को पार कर एक ऋषि के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने आम के पेड पर एक छोटा-सा घोंसला तैयार कर उसमें चिडिया को रख दिया।
चिडिया को सुरक्षित स्थान पर छोड कर गरुड फिर से कैलाश पर्वत पर गए। जब वे वहां पहुंचे, तो देवताओं का विचार-विमर्श खत्म हो चुका था और सभी देवी-देवता एक-एक कर वहां से निकल रहे थे। यमराज निकले, तो उनकी नजरों ने चिडिया को खोजा। पर वहां चिडियां नहीं दिखी और उसकी आवाज भी नदारद थी। यमराज चिडिया को पूर्व स्थान पर पाकर हंस पडे। उन्होंने कहा, चलो, मेरा हिसाब-किताब ठीक हो गया।
गरुड को यमराज की बात समझ में नहीं आई। इसलिए उन्होंने यमराज से पूछा कि आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं? यमराज ने बताया कि जब मैं यहां आया, तो द्वार के ऊपर एक चिडिया बहुत सुंदर आवाज में गा रही थी। लेकिन मेरे लेखा के मुताबिक, आज उस चिडिया की मृत्यु होनी तय थी। उसमें लिखा था कि वह यहां नहीं मरेगी। उसे सात पहाडों और नदियों के पार एक ऋषि के आश्रम में स्थित आम के पेड के नीचे लेटा नाग निगलेगा। उसे देखकर मैंने सोचा कि यह छोटी चिडिया अपने छोटे पंखों से इतनी दूर कैसे उड कर जाएगी? मुझे इस बात पर गुस्सा आया कि अगर चिडिया वहां नहीं पहुंच पाएगी, तो मेरा हिसाब-किताब ठीक नहीं हो पाएगा!
नियति देखो कि वह वहां पहुंच गई है और वह नाग अभी उसे निगल रहा है। चिडिया निश्चित समय पर मर रही है। यह बात सुनकर गरुड को बडा झटका लगा, क्योंकि उन्होंने तो सोचा था कि चिडिया को उन्होंने बचा लिया है, लेकिन वास्तव में वे उसे मौत के मुंह में डाल आए थे। यह कहानी गरुड के बारे में हो सकती है या हम मनुष्यों के बारे में भी। कई बार हम यह सोच कर कुछ करते हैं कि ऐसा करने से किसी व्यक्ति का भला होगा, लेकिन होता बुरा ही है। कई बार हम बुरा सोचते हैं, लेकिन होता भला है।
इस कहानी के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि हमारे भला या बुरा चाहने से किसी व्यक्ति का हित या अहित नहीं हो सकता है। सब कुछ ईश्वर के हाथों में है। इसलिए हमें अपना भला-बुरा प्रभु के हाथ में सौंप कर जीवन का उपयोग सद्कर्मोमें करना चाहिए।

BK BHAGWAN BHAI GODLY SERVICE AT BRAHMAKUMARIS MOUNT ABU.






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