Tuesday, 17 March 2015

  - बच्चो मे  नैतिक शिक्षा का होना अनिवार्य।

एंकर वायस-
दिन प्रतिदिन समाज मे बढती ङ्क्षहसा एंंव अपराध  एक चिंतनीय विषय है। नैतिक शिक्षा के साथ अपराध मुक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है ये वाक्य प्रजापिता ब्रहमाकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू से पधारे राजयोगी बीके भगवान भाई ने रेलवे रोड़ स्थित महाराजा अग्रसेन सीनीयर सैकेंडरी  स्कूल में छात्र-छात्राओं को जीवन मे नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर संबोधित करते हुए कहे। 5 हजार से अधिक  स्कूलों में नैतिक शिक्षा का पाठ पढाकर इंडिया बुक  आफ रिकार्ड मे ं अपना  नाम दर्ज कराने  वाल भगवान भाई ने कहा कि कुसंग,व्यसन,सिनेमा,फेसबुक,व्हाटस एप ओर फैशन से आज की युवा पीढी भटक रहे है। नैतिक शिक्षा ओर अध्यात्मिकत से ही युवा पीढी को सही दिशा मिल सकती है। नैतिक शिक्षा से ही मानवीय मन में रचनात्मक ओर सकरात्मक विकास होगा। 
वीओ-1 शिक्षा के  मूल उदेदश्य पर बोलते हुए भगवान भाई ने कहा कि चरित्रवान बनना है नशा,बुराईयों से स्वंय को मुक्त करना ही शिक्षा का मूल उदेदश्य है जो असत्य से सत्य की ओर जाए वही सच्चा ज्ञान है। जब तक हमारे व्यावाहर में परोपकार,त्यागउदारता,नम्रता,सहनशीलता,सदगुण न ही आते  तब तक हमारी शिक्षा अधूरी है। उन्होने कहा कि आज के बच्चे कल का समाज है। अग रकल वे समजा को अपराधमुकत बनाना चाहते हो तो वर्तमान के बच्चों को नैतिक शिक्षा  से संस्करीय करने की आवश्कता है।  संस्करित शिक्षा की कमी ही वर्तमान मे अपरोधो का कारण है भारत विकसित देशो की श्रेणी में शामिल होने का प्रयास कर रहा है। लेकिन समाज की बुराईया चिंता का विषय है। इस पर स्कूल  के प्रबंधक कमेटी के सदस्यो ंने बीके भाई बहनो का धन्यवाद किया। 
बाईट-
पत्रकारो से बात करते हुए  स्कूल के प्राचार्य ड़ा गणेश कौशिक  ने कहा कि सभी बच्चे बीके भाई बहनो द्वारा जो विचार  रखे गए  हैउन्हे अपने जीवन मे लेकर आए। नैतिक शिक्षा द्वारा प्राप्त चरित्र ही हमारी सम्पित है। कार्यक्रम मे छात्रो का मनोबल बढाने के लिए योगबल का अभ्यास भी करवाया गया। इस अवसर पर प्रबंधक कमेटी के प्रधान रमेश गर्ग,सुरेश सिंगला कैशियर,मिटठनलाल,कमल गुप्ता,दीपक सहित स्कूल का स्टाफ व सैंकडो छात्र उपस्थित थे। 
बाईट-पत्रकारो से बात करते हुए  भगवान भाई ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जो बेटियों को बचाने व पढाने की  जो मुहिम चलाई  जा रही है वो सफल होगी इसके लिए समाज मे महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत है वही उन्होने कहा कि आज की युवा पीढी स्वच्छता ओर बेटियों को बचाने की महिम को थाम ले तो ये देश के  लिए फायदेमंद होगा। 
नोट-इस स्टोरी की तीन फाईले नैतिक मूल्यों के नाम से भेजी जा रही है।

Saturday, 14 March 2015

नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाएं











नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है  भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक वही है जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरे को शिक्षा देता है। धारणाओं से विद्यार्थियों में बल भरता है। जीवन की धारणाओं से वाणी, कर्म और व्यक्तित्व में निखार आ जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी अगर बच्चे बिगड़ रहे हैं इसका मतलब मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। शिक्षक के अंदर के जो संस्कार हैं, उनका विद्यार्थी अनुकरण बच्चे करते हैं। शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बनना बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मागदर्शन देने वाला शिक्षक बनना है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है। किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को अपने जीवन की धारणाओं के आधार से नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाएं। इस मौके पर प्राचार्या सरोज गक्खड़, जयराम भाई, धर्मबीर श्योकंद, जेएस चहल मौजूद रहे।
स्वामी गणेशानंद सनातन धर्म बीएड कॉलेज में भगवान भाई ने किया संबोधित
कहा, जीवन की धारणाओं से शिक्षा देने वाला ही होता है शिक्षक

नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है






नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है








वर्तमान के छात्र भावी समाज है। अगर भावी समाज को आदर्श बनाना चाहते हो तो छात्राओं को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक वही है जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरे को शिक्षा देता है। धारणाओं से विद्यार्थियों में बल भरता है। जीवन की धारणाओं से वाणी, कर्म और व्यक्तित्व में निखार आ जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी अगर बच्चे बिगड़ रहे हैं इसका मतलब मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। शिक्षक के अंदर के जो संस्कार हैं, उनका विद्यार्थी अनुकरण बच्चे करते हैं। शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बनना बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मागदर्शन देने वाला शिक्षक बनना है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है। किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को अपने जीवन की धारणाओं के आधार से नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाएं। इस मौके पर प्राचार्या सरोज गक्खड़, जयराम भाई, धर्मबीर श्योकंद, जेएस चहल मौजूद रहे।

समाज सुधारने के लिए आदर्श शिक्षकों की आवश्यकता



समाज सुधारने के लिए आदर्श शिक्षकों की आवश्यकता
अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। समाज को सुधारने के लिए आदर्श शिक्षकों की आवश्यकता है। समाज शिल्पी है शिक्षक। यह बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय माउंट आबू (राजस्थान) के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कही। वे उचाना कलां में स्वामी गणेशानंद सनातन धर्म बीएड कॉलेज में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में आदर्श शिक्षक विषय पर भावी शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज की बिगड़ती परिस्थितियों में समाज को सुधारने की बहुत आवश्यकता है।
वर्तमान के छात्र भावी समाज है। अगर भावी समाज को आदर्श बनाना चाहते हो तो छात्राओं को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक वही है जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरे को शिक्षा देता है। धारणाओं से विद्यार्थियों में बल भरता है। जीवन की धारणाओं से वाणी, कर्म और व्यक्तित्व में निखार आ जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी अगर बच्चे बिगड़ रहे हैं इसका मतलब मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। शिक्षक के अंदर के जो संस्कार हैं, उनका विद्यार्थी अनुकरण बच्चे करते हैं। शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बनना बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मागदर्शन देने वाला शिक्षक बनना है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है। किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को अपने जीवन की धारणाओं के आधार से नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाएं। इस मौके पर प्राचार्या सरोज गक्खड़, जयराम भाई, धर्मबीर श्योकंद, जेएस चहल मौजूद रहे।
स्वामी गणेशानंद सनातन धर्म बीएड कॉलेज में भगवान भाई ने किया संबोधित
कहा, जीवन की धारणाओं से शिक्षा देने वाला ही होता है शिक्षक

नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा










भौतिक शिक्षा के साथ साथ विद्यार्थी को भावनात्मक, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा देना बेहद जरूरी है अन्यथा युवा पथभ्रष्ट होकर अपराध, डिप्रेशन, आत्महत्या आदि गर्त में जाने वाले रास्तों की ओर अग्रसर हो जाते हैं। बच्चों के हाथों में देश का भविष्य है। बच्चों का चहुंमुखी विकास होगा तभी देश का चहुंमुखी विकास संभव है। ब्रह्माकुमारीज के माउंट आबू स्थित इंटरनेशनल मुख्यालय से आए भगवान भाई मुख्यवक्ता के तौर पर स्कूलों में बोल रहे थे। राजकीय कन्या हाई स्कूल, उझाना गांव एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज, नरवाना में तनाव मुक्ति कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों अध्यापकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल राजकुमार रोहिल्ला एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल सुनीलदत्त ने भगवान भाई एवं ब्रह्माकुमारीज संस्था की सराहना की और प्रशंसा पत्र भेंट किया।

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