Thursday, 2 February 2012

शिव नाम का अर्थ कल्याणकारी से ही प्रतीत होता है| शिव उसी को बताया जा सकता है जिसमें सृष्टि के संपूर्ण ज्ञान को समाया जा सकता है| १) ज्योतिबिंदू स्वरूप परमात्मा शिवः परमात्मा का वास्तविक स्वरूप ज्योति बिंदू का ही है| इस स्वरूप द्वारा परमात्मा शिव मानव के शरीर में प्रवेश करते हैं और अपने कल्याणकारी ज्ञान द्वारा सृष्टि परिवर्तन का कार्य करते हैं| समय अनुसार परमात्मा शिव ने इसी स्वरूप द्वारा पृथ्वी के मानव को ज्ञान के सागर में नहलाया है जिस ज्ञान को मानव ने धर्म के रूप में आपस में बांटा है और सतयुग से कलयुग तक पृथ्वी पर मानव ने अनेका अनेक धर्मों की स्थापना भी कर ली है|

शिव नाम का अर्थ कल्याणकारी से ही प्रतीत होता है| शिव उसी को बताया जा सकता है जिसमें सृष्टि के संपूर्ण ज्ञान को समाया जा सकता है|

१) ज्योतिबिंदू स्वरूप परमात्मा शिवः
परमात्मा का वास्तविक स्वरूप ज्योति बिंदू का ही है| इस स्वरूप द्वारा परमात्मा शिव मानव के शरीर में प्रवेश करते हैं और अपने कल्याणकारी ज्ञान द्वारा सृष्टि परिवर्तन का कार्य करते हैं| समय अनुसार परमात्मा शिव ने इसी स्वरूप द्वारा पृथ्वी के मानव को ज्ञान के सागर में नहलाया है जिस ज्ञान को मानव ने धर्म के रूप में आपस में बांटा है और सतयुग से कलयुग तक पृथ्वी पर मानव ने अनेका अनेक धर्मों की स्थापना भी कर ली है|

ईश्वर की प्राप्ति के लिए परमपिता शिव परमात्मा का सही परिचय होना जरूरी है। इसके बिना लक्ष्य तक पहुंचना असंभव है। परमपिता शिव परमात्मा का परिचय देते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सत्संग में बैठने से ईश्वरीय ज्ञान नहीं हो सकता। ईश्वरीय पढ़ाई से ही भगवान शिव का वास्तविक परिचय मिलता है मनुष्य आज सुख व शांति के लिए भटक रहा है, किन्तु इनकी प्राप्ति नहीं हो रही। इसका कारण सही रास्ते की जानकारी का अभाव बताते हुए उन्होंने परमपिता शिव परमात्मा का संदेश सुनने का आह्वान किया। अच्छे संस्कारों का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरों को परेशान करके कोई भी व्यक्ति स्वयं प्रसन्न नहीं रह सकता। इस मौके पर संजीव ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का परिचय प्रस्तुत किया जबकि रामेश्वर ने परमात्मा के अवतरण पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलित करके की गई। हर्षी ने परमात्मा के ज्ञान पर आधारित गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। गीता पाठशाला की संचालिका खुशी ने संचालन व आभार जताया।

ईश्वर की प्राप्ति के लिए परमपिता शिव परमात्मा का सही परिचय होना जरूरी है। इसके बिना लक्ष्य तक पहुंचना असंभव है।
परमपिता शिव परमात्मा का परिचय देते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सत्संग में बैठने से ईश्वरीय ज्ञान नहीं हो सकता। ईश्वरीय पढ़ाई से ही भगवान शिव का वास्तविक परिचय मिलता है मनुष्य आज सुख व शांति के लिए भटक रहा है, किन्तु इनकी प्राप्ति नहीं हो रही। इसका कारण सही रास्ते की जानकारी का अभाव बताते हुए उन्होंने परमपिता शिव परमात्मा का संदेश सुनने का आह्वान किया।
अच्छे संस्कारों का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरों को परेशान करके कोई भी व्यक्ति स्वयं प्रसन्न नहीं रह सकता।
इस मौके पर संजीव ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का परिचय प्रस्तुत किया जबकि रामेश्वर ने परमात्मा के अवतरण पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलित करके की गई। हर्षी ने परमात्मा के ज्ञान पर आधारित गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। गीता पाठशाला की संचालिका खुशी ने संचालन व आभार जताया।

परमात्मा नाम से न्यारा नहीं है, उसका नाम न्यारा है। शिव परमात्मा का स्वकथित आलोकित नाम है। शिव का अर्थ है कल्याणकारी, बीज रूप, बिंदू, परमात्मा सारी सृष्टि को सद्गति दाता है इसलिए वह कल्याणकारी है। जिस प्रकार बीज किसी वृक्ष का रचयिता होता है। इसी प्रकार परमात्मा शिव भी मनुष्य सृष्टि रूपी वृक्ष का निर्मित बीज है। इसलिए उसे सदाशिव भी कहते हैं। परमात्मा शिव का कोई रचयिता नहीं है इसलिए उसे स्वयंभू अथवा शंभू भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा शिव,ज्योति बिंदु स्वरूप हैं। उनका कोई शारीरिक आकार नहीं होता है इसलिए उन्हें निराकार कहा जाता है। परमात्मा और आत्माएं भिन्न-भिन्न सत्ताएं हैं। परमात्मा एक है जबकि आत्मा अनेक हैं। शिव विश्व की सर्व आत्माओं के परमपिता

परमात्मा नाम से न्यारा नहीं है, उसका नाम न्यारा है। शिव परमात्मा का स्वकथित आलोकित नाम है। शिव का अर्थ है कल्याणकारी, बीज रूप, बिंदू, परमात्मा सारी सृष्टि को सद्गति दाता है इसलिए वह कल्याणकारी है। जिस प्रकार बीज किसी वृक्ष का रचयिता होता है। इसी प्रकार परमात्मा शिव भी मनुष्य सृष्टि रूपी वृक्ष का निर्मित बीज है। इसलिए उसे सदाशिव भी कहते हैं। परमात्मा शिव का कोई रचयिता नहीं है इसलिए उसे स्वयंभू अथवा शंभू भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा शिव,ज्योति बिंदु स्वरूप हैं। उनका कोई शारीरिक आकार नहीं होता है इसलिए उन्हें निराकार कहा जाता है। परमात्मा और आत्माएं भिन्न-भिन्न सत्ताएं हैं। परमात्मा एक है जबकि आत्मा अनेक हैं।

शिव विश्व की सर्व आत्माओं के परमपिता

परमात्मा नाम से न्यारा नहीं है, उसका नाम न्यारा है। शिव परमात्मा का स्वकथित आलोकित नाम है। शिव का अर्थ है कल्याणकारी, बीज रूप, बिंदू, परमात्मा सारी सृष्टि को सद्गति दाता है इसलिए वह कल्याणकारी है। जिस प्रकार बीज किसी वृक्ष का रचयिता होता है। इसी प्रकार परमात्मा शिव भी मनुष्य सृष्टि रूपी वृक्ष का निर्मित बीज है। इसलिए उसे सदाशिव भी कहते हैं। परमात्मा शिव का कोई रचयिता नहीं है इसलिए उसे स्वयंभू अथवा शंभू भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा शिव,ज्योति बिंदु स्वरूप हैं। उनका कोई शारीरिक आकार नहीं होता है इसलिए उन्हें निराकार कहा जाता है। परमात्मा और आत्माएं भिन्न-भिन्न सत्ताएं हैं। परमात्मा एक है जबकि आत्मा अनेक हैं।

परमात्मा नाम से न्यारा नहीं है, उसका नाम न्यारा है। शिव परमात्मा का स्वकथित आलोकित नाम है। शिव का अर्थ है कल्याणकारी, बीज रूप, बिंदू, परमात्मा सारी सृष्टि को सद्गति दाता है इसलिए वह कल्याणकारी है। जिस प्रकार बीज किसी वृक्ष का रचयिता होता है। इसी प्रकार परमात्मा शिव भी मनुष्य सृष्टि रूपी वृक्ष का निर्मित बीज है। इसलिए उसे सदाशिव भी कहते हैं। परमात्मा शिव का कोई रचयिता नहीं है इसलिए उसे स्वयंभू अथवा शंभू भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा शिव,ज्योति बिंदु स्वरूप हैं। उनका कोई शारीरिक आकार नहीं होता है इसलिए उन्हें निराकार कहा जाता है। परमात्मा और आत्माएं भिन्न-भिन्न सत्ताएं हैं। परमात्मा एक है जबकि आत्मा अनेक हैं।

शिव विश्व की सर्व आत्माओं के परमपिता

Saturday, 7 January 2012

कहो, वही, जो सच्चा हो, करो वही, जो अच्छा हो । बोलो, जो मीठ हो, कहो, जो गीता हो, देखो, जो सत्यम्‌ शिवम्‌ सुन्दरम्‌ हो, दिखाओ, जो दिव्य और भव्य हो, खाओ वही, जासे प्रभु का प्रसाद हो, पियो वही, जो अनहद नाद हो, जिसमें अमृत का स्वाद हो । चाल वही चलो, जिसमें सच्चरित्र हो और कार्य वही करो, जो पवित्र हो, जिसमें जीवन का इत्र हो । िेडा पढो पर चिन्तन ज्यादा करो । थोडा बोलो और सुनो ज्यादा । थोडा पढना और चिन्तन ज्यादा करना, कम बोलना और ज्यादा सुनना- यह ज्ञानी का लक्षण है । जीभ एक और कान दो हैं । पता है क्यों ? इसलिए कि आदमी सुने ज्यादा और बोले कम । और आज का आदमी सुनतातो कम है और बोलता ? बाप रे बाप ! सारे दिन और देर रात तक बोलता है । और कुछ लोग तो सपने में भी बोलते हैं । (बडबडाते हैं) वाचाल मत बनो, बकवास मत करो । सुखी जीवन के पॉंच सूत्र हैं । पहला- जीवन में आसक्ति कम रखो । दूसरा - जो सामने आ रहा है, उसे स्वीकार करते चले जाओ । तीसरा - तुलना में खडे मत होओ । चौथा - पागलपन कम रखो और पॉंचवा - कम बोलो, काम का बोलो । ये छोटी-छोटी नसीहतें हैं, पर बडे काम की हैं । इन्हें याद रखो और समय आने पर जीओ । बहुत सुख और खुशियॉं मिलेगीं, और यदि इन्हें नजरअंदाज कर दिया, इन्हें भुला दिया तो फिर दुर्घटना घटने में वक्त नहीं लगेगा । मास्टर ने बच्चों से पूछा- बच्चों ! बताओ घटना और दुर्घटना में क्या अन्तर है ? सभी बच्चे चुप । मगर मास्टर ने देखा- पीछे कोने में एक बच्चा हाथ उठा रहा है । मास्टर ने कहा - शाबास बेटा ! खडे होओ और बताओ घटना में आग लग गई - यह तो हुई घटना, मगर आप सही सलामत बच गये - यह हुई दुर्घटना । आया ना मजा । अफसोस है, आदमी चलते-चलते थक जाता है । मगर चलना नहीं सीख पाता । बोलते-बोलते जीवन बीत जाता है मगर बोलना नहीं सीख पाता है । बोलता है तो ऐसा जैसा कि लट्ठ मार रहा हो । सारी जिन्दगी निकल गई पर आदमी को नहीं पता किवो अब तक जिन्दा है । अब क्या बचा है । जिन्दगी की सांझ सामने है

कहो, वही, जो सच्चा हो, करो वही, जो अच्छा हो । बोलो, जो मीठ हो, कहो, जो गीता हो, देखो, जो सत्यम्‌ शिवम्‌ सुन्दरम्‌ हो, दिखाओ, जो दिव्य और भव्य हो, खाओ वही, जासे प्रभु का प्रसाद हो, पियो वही, जो अनहद नाद हो, जिसमें अमृत का स्वाद हो । चाल वही चलो, जिसमें सच्चरित्र हो और कार्य वही करो, जो पवित्र हो, जिसमें जीवन का इत्र हो । िेडा पढो पर चिन्तन ज्यादा करो । थोडा बोलो और सुनो ज्यादा । थोडा पढना और चिन्तन ज्यादा करना, कम बोलना और ज्यादा सुनना- यह ज्ञानी का लक्षण है । जीभ एक और कान दो हैं । पता है क्यों ? इसलिए कि आदमी सुने ज्यादा और बोले कम । और आज का आदमी सुनतातो कम है और बोलता ? बाप रे बाप ! सारे दिन और देर रात तक बोलता है । और कुछ लोग तो सपने में भी बोलते हैं । (बडबडाते हैं) वाचाल मत बनो, बकवास मत करो । सुखी जीवन के पॉंच सूत्र हैं । पहला- जीवन में आसक्ति कम रखो । दूसरा - जो सामने आ रहा है, उसे स्वीकार करते चले जाओ । तीसरा - तुलना में खडे मत होओ । चौथा - पागलपन कम रखो और पॉंचवा - कम बोलो, काम का बोलो । ये छोटी-छोटी नसीहतें हैं, पर बडे काम की हैं । इन्हें याद रखो और समय आने पर जीओ । बहुत सुख और खुशियॉं मिलेगीं, और यदि इन्हें नजरअंदाज कर दिया, इन्हें भुला दिया तो फिर दुर्घटना घटने में वक्त नहीं लगेगा ।
मास्टर ने बच्चों से पूछा- बच्चों ! बताओ घटना और दुर्घटना में क्या अन्तर है ? सभी बच्चे चुप । मगर मास्टर ने देखा- पीछे कोने में एक बच्चा हाथ उठा रहा है । मास्टर ने कहा - शाबास बेटा ! खडे होओ और बताओ घटना में आग लग गई - यह तो हुई घटना, मगर आप सही सलामत बच गये - यह हुई दुर्घटना । आया ना मजा । अफसोस है, आदमी चलते-चलते थक जाता है । मगर चलना नहीं सीख पाता । बोलते-बोलते जीवन बीत जाता है मगर बोलना नहीं सीख पाता है । बोलता है तो ऐसा जैसा कि लट्ठ मार रहा हो । सारी जिन्दगी निकल गई पर आदमी को नहीं पता किवो अब तक जिन्दा है । अब क्या बचा है । जिन्दगी की सांझ सामने है

om shanti


Thursday, 5 January 2012

भगवान दगडू चवरे तळेवाडी ब्रह्माकुमार भगवानभाईंनी सांगली महाराष्ट्र मानपत्र : रद्दीच्या कागदावरील शिवसंदेश वाचून एक सफल राजयोगी बनलेले : ब्राहृाकुमार भगवान भाई इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड मधे सुवर्णाक्षरानी नाव नो महाराष्ट्र मानपत्र : महाराष्ट्राच्या शिरपेचातील मानाचा तूरा : नवरत्नांची खाण असणा­या महाराष्ट्राच्या मातीत जन्मलेल्या रत्नांची महिमा सांगणारे स्वतंत्र व्यासपिठ : रद्दीच्या कागदावरील शिवसंदेश वाचून एक सफल राजयोगी बनलेले : ब्राहृाकुमार भगवान भाई इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड मधे सुवर्णाक्षरानी नाव नोंदवलायं भगवान भाई यांनी. 12. दिल्ली येथे इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड चे मुख्य संपादक वि·ारुप राय चौधरी हे ब्रा.कु.भगवान भाई (शान्तीवन आबू रोड) यांना प्रमाणपत्र देतांना सोबत इंडिया बुक ऑफ रेकार्डची टीम. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालयाचे मुख्यालय असलेल्या माऊंट अबू येथील ब्रह्माकुमार भगवानभाईंनी केलेल्या उल्लेखनीय कामगिरीची दखल घेवून त्यांच्या कार्याची "इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड' मध्ये नुकतीच नोंद झाली असून दिल्ली येथे एका विशेष समारंभामध्ये इंडिया बुक ऑफ रेकार्डचे मुख्य संपादक विश्वरूपराय चौधरी यांच्या हस्ते त्यांना सन्मानित करण्यात आले. भगवानभाईंनी आतापर्यंत भारतातील विविध प्रांतातील 5000 शाळा, महाविद्यालयांमध्ये जाऊन लाखो विद्यार्थ्यांना मूल्यनिष्ठ शिक्षणाद्वारे नैतिक व अध्यात्मिक विकासासाठी उद्‌बोधन केले आहे. 800 कारागृहांमध्ये जाऊन हजारो कैद्यांना गुन्हेगारी सोडून आपल्या जीवनामध्ये सद्‌भावना, मूल्य तसेच मानवतेला स्थापित करण्यासाठी प्रेरित केले आहे. या कार्याची नोंद घेवून त्यांची या पुरस्कारासाठी निवड करण्यात आली. सत्कारानंतर प्रतिक्रिया व्यक्त करताना ब्र. कु.भगवानभाई म्हणाले, समाजामधील भ्रष्टाचार, व्यसनाधिनता, गुन्हेगारी समाप्त करावयाची असेल तर त्यासाठी शिक्षणामध्ये परिवर्तनाची आवश्यकता आहे. शाळा/ महाविद्यालयांमधूनच समाजाच्या प्रत्येक क्षेत्रामध्ये व्यक्ती प्रवेश करते. आजचा विद्यार्थीच उद्याचा समाज आहे. म्हणूनच समाजाच्या विकासासाठी शिक्षणामध्ये मूल्य व अध्यात्मिकतेचा समावेश करण्याची आवश्यकता आहे. सांगली जिल्ह्यात आटपाडी तालुक्यातील तळेवाडी या छोट्याशा खेड्यात एका निरक्षर व गरीब कुटुंबात जन्मलेल्या भगवानभाईंना लिहिण्या- वाचण्यासाठी वही, पुस्तकेसुध्दा मिळत नव्हती. वयाच्या 11 वर्षी त्यांनी शाळेत जायला सुरूवात केली. ते जुन्या रद्दीमधील वह्यांची कोरी पाने व शाईने लिहिलेली पाने पाण्याने धुवून, सुकवून त्या पानांचा उपयोग लिहिण्यासाठी करीत. अशाच रद्दीमध्ये त्यांना ब्रह्माकुमारी संस्थेच्या एका पुस्तकाची काही पाने मिळाली. या रद्दीतील पानानींच त्यांचे जीवन बदलून गेले. त्या पानावर असलेल्या पत्त्यावरून ते ब्रह्माकुमारीसंस्थेमध्ये पोहचले व तेथील ईश्वरीय ज्ञान व राजयोगाचा अभ्यास करून आपले मनोबल वाढविले व त्या फलस्वरूप माऊंट अबू येथील आपले सेवाकार्य सांभाळून आजपर्यंत त्यांनी 5000 शाळा, महाविद्यालये व 800 कारागृहात जाऊन या सेवेचे एक रेकॉर्ड प्रस्थापित केले. वर्तमानसमयी ब्रह्माकुमार भगवानभाई ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालयाच्या शांतीवन या मुख्यालयातील विशाल किचनमध्ये सेवारत असून अनेक मासिकातून तसेच वृत्तपत्रातून आतापर्यंत 2000 हून अधिक लेख लिहिले आहेत. त्यांना मिळालेल्या या सन्मानाबद्दल सातारा सेवाकेंद्राच्या संचालिका ब्रह्माकुमारी रूक्मिणी बहेनजी व शिक्षणाधिकारी (माध्य.) मकरंद गोंधळी यांनी त्यांचे अभिनंदन केले.

भगवान दगडू चवरे तळेवाडी ब्रह्माकुमार भगवानभाईंनी सांगली
महाराष्ट्र मानपत्र : रद्दीच्या कागदावरील शिवसंदेश वाचून एक सफल राजयोगी बनलेले : ब्राहृाकुमार भगवान भाई इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड मधे सुवर्णाक्षरानी नाव नो
महाराष्ट्र मानपत्र : महाराष्ट्राच्या शिरपेचातील मानाचा तूरा : नवरत्नांची खाण असणा­या महाराष्ट्राच्या मातीत जन्मलेल्या रत्नांची महिमा सांगणारे स्वतंत्र व्यासपिठ :
रद्दीच्या कागदावरील शिवसंदेश वाचून एक सफल राजयोगी बनलेले : ब्राहृाकुमार भगवान भाई
इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड मधे सुवर्णाक्षरानी नाव नोंदवलायं भगवान भाई यांनी.
12. दिल्ली येथे इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड चे मुख्य संपादक वि·ारुप राय चौधरी हे ब्रा.कु.भगवान भाई (शान्तीवन आबू रोड) यांना प्रमाणपत्र देतांना सोबत इंडिया बुक ऑफ रेकार्डची टीम.
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालयाचे मुख्यालय असलेल्या माऊंट अबू येथील ब्रह्माकुमार भगवानभाईंनी केलेल्या उल्लेखनीय कामगिरीची दखल घेवून त्यांच्या कार्याची "इंडिया बुक ऑफ रेकार्ड' मध्ये नुकतीच नोंद झाली असून दिल्ली येथे एका विशेष समारंभामध्ये इंडिया बुक ऑफ रेकार्डचे मुख्य संपादक विश्वरूपराय चौधरी यांच्या हस्ते त्यांना सन्मानित करण्यात आले.
भगवानभाईंनी आतापर्यंत भारतातील विविध प्रांतातील 5000 शाळा, महाविद्यालयांमध्ये जाऊन लाखो विद्यार्थ्यांना मूल्यनिष्ठ शिक्षणाद्वारे नैतिक व अध्यात्मिक विकासासाठी उद्‌बोधन केले आहे. 800 कारागृहांमध्ये जाऊन हजारो कैद्यांना गुन्हेगारी सोडून आपल्या जीवनामध्ये सद्‌भावना, मूल्य तसेच मानवतेला स्थापित करण्यासाठी प्रेरित केले आहे. या कार्याची नोंद घेवून त्यांची या पुरस्कारासाठी निवड करण्यात आली.
सत्कारानंतर प्रतिक्रिया व्यक्त करताना ब्र. कु.भगवानभाई म्हणाले, समाजामधील भ्रष्टाचार, व्यसनाधिनता, गुन्हेगारी समाप्त करावयाची असेल तर त्यासाठी शिक्षणामध्ये परिवर्तनाची आवश्यकता आहे. शाळा/ महाविद्यालयांमधूनच समाजाच्या प्रत्येक क्षेत्रामध्ये व्यक्ती प्रवेश करते. आजचा विद्यार्थीच उद्याचा समाज आहे. म्हणूनच समाजाच्या विकासासाठी शिक्षणामध्ये मूल्य व अध्यात्मिकतेचा समावेश करण्याची आवश्यकता आहे.
सांगली जिल्ह्यात आटपाडी तालुक्यातील तळेवाडी या छोट्याशा खेड्यात एका निरक्षर व गरीब कुटुंबात जन्मलेल्या भगवानभाईंना लिहिण्या- वाचण्यासाठी वही, पुस्तकेसुध्दा मिळत नव्हती. वयाच्या 11 वर्षी त्यांनी शाळेत जायला सुरूवात केली. ते जुन्या रद्दीमधील वह्यांची कोरी पाने व शाईने लिहिलेली पाने पाण्याने धुवून, सुकवून त्या पानांचा उपयोग लिहिण्यासाठी करीत. अशाच रद्दीमध्ये त्यांना ब्रह्माकुमारी संस्थेच्या एका पुस्तकाची काही पाने मिळाली. या रद्दीतील पानानींच त्यांचे जीवन बदलून गेले. त्या पानावर असलेल्या पत्त्यावरून ते ब्रह्माकुमारीसंस्थेमध्ये पोहचले व तेथील ईश्वरीय ज्ञान व राजयोगाचा अभ्यास करून आपले मनोबल वाढविले व त्या फलस्वरूप माऊंट अबू येथील आपले सेवाकार्य सांभाळून आजपर्यंत त्यांनी 5000 शाळा, महाविद्यालये व 800 कारागृहात जाऊन या सेवेचे एक रेकॉर्ड प्रस्थापित केले.
वर्तमानसमयी ब्रह्माकुमार भगवानभाई ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालयाच्या शांतीवन या मुख्यालयातील विशाल किचनमध्ये सेवारत असून अनेक मासिकातून तसेच वृत्तपत्रातून आतापर्यंत 2000 हून अधिक लेख लिहिले आहेत. त्यांना मिळालेल्या या सन्मानाबद्दल सातारा सेवाकेंद्राच्या संचालिका ब्रह्माकुमारी रूक्मिणी बहेनजी व शिक्षणाधिकारी (माध्य.) मकरंद गोंधळी यांनी त्यांचे अभिनंदन केले.