Friday, 26 May 2017

पोडी (उत्तराखंड ) ---में तनाव मुक्ति पर प्रोग्राम

पोडी (उत्तराखंड ) ---में तनाव मुक्ति पर प्रोग्राम  
आयोजक स्थानीय ब्रह्माकुमारीज श्रीनगर (उत्तराखंड ) 
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व विकास 
बी के सुमन बहन राजयोग शिक्षिका श्रीनगर उत्तराखंड
प्रभारी बी के उषा बहन असंध हरियाणा
मुख्य अतिथि ---डॉ कमला गुप्ता जिला महिला चिकित्सालय मुख्य चिकित्सक (मेडिकल ऑफिसर )
भोपाल चोधरी --किसान मंच अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार
श्री राणा जी बिल्डर    
बी के तेजस भाई असंध हरियाणा 
प्रोग्राम कि शुरवात दीप प्रज्वलन करके और स्वागत न्रत्य से कि गयी
इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि वर्तमान समय जितनी भी समस्या हैं उन सबका कारण है नकारात्मक सोच। नकारात्मक सोच से तनाव बढ़ता है। तनाव मुक्त बनने के लिए सकारात्मक विचार संजीवनी बूटी है। सकारात्मक विचार से ही मुक्ति संभव है।
भगवान भाई ने कहा कि 19वीं सदी तर्क की थी, 20वीं सदी प्रगति की रही और 21वीं सदी तनाव पूर्ण होगी। ऐसे तनावपूर्ण परिस्थितियों में तनाव से मुक्त होने सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि मन में लगातार चलने वाले नकारात्मक विचारों से दिमाग में विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ उतरकर शरीर में आ जाते हैं। इनसे अनेक बीमारियां होती हैं। मन के नकारात्मक विचारों से मनोबल, आत्मबल कमजोर बन जाता है।

भगवान भाई ने कहा कि जहां तनाव है वहां अनेक समस्याएं बढ़ जाती हैं। तनाव के कारण आपसी मतभेद, टकराव बढ़ जाते हैं। जहां तनाव है वहां मानसिक अशांति के वश होकर मनुष्य व्यसन, नशा, डिप्रेशन के वश हो जाता है। उन्होंने बताया कि मन चलने वाले नकारात्मक विचारों के कारण ही मन में घृण, नफरत, बैर, विरोध, आवेश और क्रोध उत्पन्न होता है।

पोडी (उत्तराखंड ) ---गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में नैतिक मूल्य पर कार्यक्रम

पोडी (उत्तराखंड ) ---गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में  नैतिक मूल्य पर कार्यक्रम 
विषय नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व विकास 
बी के सुमन बहन राजयोग शिक्षिका श्रीनगर उत्तराखंड
प्रभारी बी के उषा बहन असंध हरियाणा
प्रिंसिपल ---श्री अनुसया प्रसाद पोडी (उत्तराखंड ) ---गुरुकुल (संस्क्रत विद्यालय) भुवनेश्वरी पोडी में  नैतिक मूल्य पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय ब्रह्माकुमारीज श्रीनगर (उत्तराखंड ) 
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट
नविन जुयाल सहायक शिक्षिक
बी के तेजस भाई असंध हरियाणा 
इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि सुखी जीवन के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। भौतिक शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते।उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।

हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध
करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर
सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का

मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

पोडी (उत्तराखंड ) ---गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में

पोडी (उत्तराखंड ) ---गुरु राम राय पब्लिक स्कूल में  नैतिक मूल्य पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय ब्रह्माकुमारीज श्रीनगर (उत्तराखंड ) 
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व विकास 
बी के सुमन बहन राजयोग शिक्षिका श्रीनगर उत्तराखंड
प्रभारी बी के उषा बहन असंध हरियाणा
प्रिंसिपल ---श्री आर पी ढोढोयाल   
बी के तेजस भाई असंध हरियाणा 
 इस अवसर पर  राजयोगी बी.के. भगवान भाई ने कहा कि गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा   भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मूल्यांकन,आचरण,अनुकरण,लेखन,व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार अथवा असत्य से ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।

भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। स्थानीय राजयोग केन्द्र बहन ने कहा कि आध्यात्मिकता अपनाने पर जीवन में नैतिक मूल्यों का प्रवेश संभव हैं। 

जगाधरी (हरियाणा) – में सरस्वती विद्या मंदिर

जगाधरी  (हरियाणा) में सरस्वती विद्या मंदिर  में नैतिक शिक्षा का जीवन में पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक शिक्षा जीवन में महत्व  
प्रिंसिपल श्री धनदास गर्ग  
उप प्रिंसिपल –अश्वनी कुमार गुप्ता  
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
भगवान भाई ने कहा कि गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा  भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं।नैतिक शिक्षा से नैतिकता आएगी | उन्होंने कहा नैतिक मूल्यों की कमी ही समाज के  हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मूल्यांकन,आचरण,अनुकरण,लेखन,व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार अथवा असत्य से ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।

भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। 

जगाधरी (हरियाणा) – में सरस्वती पब्लिक स्कूल

जगाधरी  (हरियाणा) में सरस्वती पब्लिक स्कूल  में नैतिक शिक्षा का जीवन में   पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक शिक्षा जीवन में महत्व   
प्रिंसिपल श्री दीपक सिंघला  
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
भगवान् भाई ने कहा की  नैतिक मूल्यों की कमी यही व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुसरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान व अन्य बातों के लिए प्रेरणा देने की आवश्यकता है। ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बन्धनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही शिक्षा है। उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त समाज के लिए संस्कारित शिक्षा जरूरी है।

है। 

जगाधरी (हरियाणा) – में सनातन धर्म सीनियर सेकण्डरी

जगाधरी  (हरियाणा) में सनातन धर्म सीनियर सेकण्डरी स्कूल  में नैतिक शिक्षा चरित्र निर्माण  पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक शिक्षा चरित्र निर्माण 
सहायक प्रिंसिपल श्रीमती संध्या गर्ग
श्रीमति---जगधिश्री गुप्ता सीनियर शिक्षिका   
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि पढाई  में आपकी चाहे कितनी भी दिलचस्पी हो या पढने का जूनून हो परन्तु परीक्षा के वक्त अधिकांश छात्र तनाव (Stress) की स्थिति में आ ही जाते है. परीक्षा का थोड़ा बहुत तनाव तो Student को पढने के लिए प्रेरित करता है लेकिन इस तनाव की अधिकता आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है. उन्होंने कहा कि कई छात्र एग्जाम के समय अपने पढाई के टाइम को बहुत बढ़ा देते है और कुछ अच्छे बच्चे और अधिक नंबर लाने के चक्कर में दिन भर किताबो से चिपके रहते है. ऐसी स्थिति का परिणाम यह होता है की Student परीक्षा के दौरान तो Stress में रहता ही है, साथ ही वह Result आने तक भी चिंता में डूबा रहता है. किसी Student के लिए यह सब ठीक नहीं है. परीक्षा से होने वाले तनाव के कारण भय व डर की स्थिति उत्पन्न होती है जिसे एग्जाम फोबिया (Exam Phobia) कहा जाता है. ऐसी Situation में स्टूडेंट को कड़ी व पूरी मेहनत करने के बावजूद भी अनुकूल परिणाम नहीं मिल पाता और वह छात्र अगर high marks लाने वाला होता है तो उसके marks बहुत ही कम आते है. जो उसके Future को अन्धकार में ले जा सकता है. इसलिए आपके लिए यह जरुरी है की इस तनाव को खुद पर हावी न होने दे और इससे बचे  अभिभावकों (Perents) से बेहतर परिणाम लाने का दवाब होना भगवान् भाई ने कहा कि वर्तमान में विद्यर्थी के तनाव का एक यह भी कारण है कि  Perents का अपने बच्चे पर अधिक marks लाने का माँ बाप का दबाव डालना, जो लगभग हर स्टूडेंट के तनाव का कारण बनता है. हर माता पिता यह चाहते है की उनका बच्चा बहुत अच्छे marks लाये और उनका नाम रोशन करे. अच्छे marks से उसे अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल जायेगा या वो उसे कोई कोर्स कराये जिससे उसका भविष्य उज्ज्वल बने. इस तरह का दबाव बार बार डालने से स्टूडेंट पर बहुत ज्यादा marks लाने का बोझ पड़ जाता है. जो उसको तनाव में धकेल देता है. कई छात्र पूरे सालभर मौज मस्ती करते है और जब परीक्षा की घडी आती है उस समय बहुत परेशान हो जाते है. वे परीक्षा के दिनों से कुछ समय पूर्व पढ़ना आरम्भ करते है जिससे उनको अपनी पढाई एक चट्टान नजर आती है. पढाई करने का दबाव उनको मानसिक तौर पर बीमार बनाने लगता है.
 उन्हों ने बताया कि पूरे सालभर थोड़ा थोड़ा भी पढता है वह परिक्षा के समय चिंता से मुक्त रहता है वही उन छात्रो को इस समय बहुत कठिनाई होती है जिन्होंने पूरे साल कुछ भी पढ़ा नहीं होता. इसलिए Exam के लिए पूरी तरह Prepare न होना Students में तनाव का Reason होता है.यह दबाव हर उस छात्र को होता है जिसको अच्छे नंबर लाने होते है. आपने 3 इडियट्स का यह डायलॉग जरुर सुना होगा की खुद के Fail होने पर उतना दुःख नहीं होता है जितना दुःख अपने Best दोस्त के प्रथम आने पर होता है”. यह मानवीय प्रकृति है जो बिल्कुल सच है. अपनी Class में सबसे ज्यादा नंबर लाना या अपने शहर में सबसे ज्यदा marks लाना. मेरिट लिस्ट में खुद को शामिल करना. यह वह दबाव होता है जो स्टूडेंट खुद में लेता है.

अच्छे मार्क्स लाने का दबाव भी छात्र को तनाव में डालता है.पूरे साल आप पढाई करते है और फिर आपको अपना पूरे साल का Report Card देना होता है जो की Exam के रूप में आपके सामने आता है. जब परीक्षा पूरी हो जाती है तो आपको Free Time मिलता है.इस समय उन स्टूडेंट्स को कुछ भी Problem नहीं होती जिन्होने पूरे आत्मविश्वास और लगन से परीक्षा दी होती है लेकिन जिस छात्र ने अच्छी तरह से पढ़कर और पूरी लगन से एग्जाम नहीं दिए होते है या जिसको अच्छा रिजल्ट आने का कॉन्फिडेंस नहीं होता वे छात्र इस समय बहुत परेशान रहते है और वे Stress की चपेट में आते है.चाहे परीक्षा के तैयारी का समय हो, परीक्षा का वक्त हो या उसके बाद रिजल्ट के इन्तजार का माहौल हो. इस Stress से बचना बहुत जरुरी है. इसलिए रिलैक्स स्टडी से ही अच्छे परिणाम की उम्मीद की जा सकती है. Relaxed रहे और Relaxed Study करे.
प्रोग्राम के अंत में उप प्रिंसिपल ने भी अपना उद्भोधन दिया गया