Saturday, 14 March 2015

नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा










भौतिक शिक्षा के साथ साथ विद्यार्थी को भावनात्मक, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा देना बेहद जरूरी है अन्यथा युवा पथभ्रष्ट होकर अपराध, डिप्रेशन, आत्महत्या आदि गर्त में जाने वाले रास्तों की ओर अग्रसर हो जाते हैं। बच्चों के हाथों में देश का भविष्य है। बच्चों का चहुंमुखी विकास होगा तभी देश का चहुंमुखी विकास संभव है। ब्रह्माकुमारीज के माउंट आबू स्थित इंटरनेशनल मुख्यालय से आए भगवान भाई मुख्यवक्ता के तौर पर स्कूलों में बोल रहे थे। राजकीय कन्या हाई स्कूल, उझाना गांव एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज, नरवाना में तनाव मुक्ति कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों अध्यापकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल राजकुमार रोहिल्ला एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल सुनीलदत्त ने भगवान भाई एवं ब्रह्माकुमारीज संस्था की सराहना की और प्रशंसा पत्र भेंट किया।

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Wednesday, 11 February 2015

परमात्मा सर्व आत्माओं का पिता है























परमात्मा सर्व आत्माओं का पिता है। यदि सबके अंदर वही एक सत्ता विराजमान है तो सभी परमात्मा बाप हो जायें तो फिर हमारा आपस में भाई-भाई का नाता ही समाप्त हो जायेगा। धर्मात्मायें, देवात्मायें, पुण्यात्मायें, पापात्मायें अनेक हैं जबकि परमात्मा एक है। परमात्मा यदि सब जगह विद्यमान होता है तो उन्हें ऊपर वाला न कहकर अंदर वाला कहना चाहिए था तथा फिर बुलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि परमात्मा तो धर्म, ग्लानि के समय अवतरित होता है। शास्त्रों के अनुसार उन्हें हर युग में 24 अवतार लेकर आना बताया गया है। उन्होंने कहा कि गीता का सत्य ज्ञान स्वयं परमपिता परमात्मा शिव द्वारा इस कलियुग के अंत में शीघ्र होने वाले महाविनाश के पहले जब पूरी दुनियां कुरुक्षेत्र बन जाती है तब श्रीकृष्ण की आत्मा के 84 वें जन्म के शरीर में दिव्य प्रवेश कराके दिया जाता है। उस शरीर का नाम प्रजापिता ब्रह्मा रखते हैं जिन्हें कोटों में कोई भी पहचान पाते हैं। आखिर वो श्रेष्ठ आत्मा कौन है जिसके शरीर रूपी रथ द्वारा स्वयं परमात्मा इस पतित पुरानी नरक की दुनियां को बदलकर पावन सतयुगी सृष्टि की स्थापना कर 79  वर्षो से कर रहे हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिला व पुरुषों ने हिस्सेदारी की।

‘यह कारागृह नहीं बल्कि सुधारगृह है










भास्कर संवाददाता-!-अंबाह 
‘यह कारागृह नहीं बल्कि सुधारगृह है, यहां आपको सुधरने के लिए भेजा है। आपको चाहिए कि यहां से निकलकर आप बैर भाव के चलते बदला लेने जैसा अपराध न करें, बल्कि बदलकर सामाजिक हो जाएं’ यह बात प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू से पधारे राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने उप जेल अंबाह में कैदियों को संबोधित करते हुए कही। 
ज्ञात हो कि शुक्रवार को स्थानीय जेल में संस्कार परिवर्तन व व्यवहार शुद्धि विषय पर कैदियों के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। भगवान भाई ने कहा कि सभी कैदी भाई खुद को बदलने के लिए यह सोचे कि आखिर वे इस संसार में अपराध करने या अपराधी बनने आए थे? क्या मेरे जीवन का उद्देश्य अपराधी बनना था? अगर इन बातों का जवाब आपको ‘न’ के रूप में प्राप्त हो तो समझ लीजिए कि आपको बदलना है। कार्यक्रम में कैदियों के अलावा स्थानीय प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सदस्य, जेल कर्मी व शहर के समाजसेवी भी उपस्थित रहे।

Sunday, 12 October 2014

अध्यापक में सहनशीलता होना जरूरी

अध्यापक में सहनशीलता होना जरूरी\'

२० अगस्त २०१४ २३:०३:१३ bhaskar
मोगा| शुकदेवाकृष्णा कॉलेज ऑफ एजुकेशन फॉर गर्ल्स घल्लकलां में विस्तार भाषण का आयोजन किया गया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंटआबू राजस्थान से ब्रह्म कुमार भगवान भाई मोगा से बहन संजीवनी विशेष रूप से उपस्थित हुए। कॉलेज के चेयरमैन डा. अशोक गर्ग प्राचार्य डा. सुधा शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। भगवान भाई ने आदर्श शिक्षक सकारात्मक चिंतन विषय पर विचार पेश किए। उन्होंने कहा कि एक आदर्श अध्यापक में सहनशीलता, ईमानदारी, सत्य दया जैसे गुण होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि नकारात्मक सोच से इंसान को कई तरह की बीमारियां लग जाती है इसलिए अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना चाहिए। वहीं बहन संजीवनी ने बताया कि हमें प्रकृति से सीख लेनी चाहिए। कॉलेज चेयरमैन अशोक गर्ग, प्राचार्य सुधा शर्मा डा. केडी शर्मा ने भगवान भाई, बहन संजीवनी, डा. बलदेव नागपाल, परमिंदर शर्मा, राकेश बजाज अमन सिंगला को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर बीएड ईटीटी स्टाफ के समस्त सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित थे।