Tuesday, 29 April 2014

सकारात्मक चिन्तन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि सकारात्मक चिन्तन से समाज में मूल्यों की खुशबू फैलती










बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास संभव है। यह बात प्रजापिता ब्रह्माकमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट आबू राजस्थान से पधारे राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कही। वे किरोड़ीमल इंजीनियरिंग कॉलेज ऑफ टेक्नालॉजी में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर छात्र-छात्राओं को सम्बोधित कर रहे थे।

भगवान भाई ने कहा कि शैक्षणिक जगत में विद्यार्थियों के लिए नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों की कमी यही व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुसरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान व अन्य बातों के लिए प्रेरणा देने की आवश्यकता है। ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बन्धनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही शिक्षा है। उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त समाज के लिए संस्कारित शिक्षा जरूरी है।

सिनेमा व इंटरनेट ने भटकाया - ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि वर्तमान समय कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सिनेमा इन्टरनेट व टीवी. के माध्यम से युवा पीढ़ी पर पाश्चात्य संस्कृति का आघात हो रहा है। इस आघात से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाए, तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे। वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि हमारे मूल्य हमारी विरासत है। मूल्य की संस्कृति के कारण भारत की पूरे विश्व में पहचान है। इसलिए नैतिक मूल्य, मानवीय मूल्यों की पुर्नस्थापना के लिए सभी को सामूहिक रूप में प्रयास करने चाहिए।

सकारात्मक चिन्तन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि सकारात्मक चिन्तन से समाज में मूल्यों की खुशबू फैलती है। सकारात्मक चिन्तन से जीवन की हर समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने शिक्षा का मूल उद्देश्य बताते हुए कहा कि चरित्रवान, गुणवान बनना ही शिक्षा का उद्देश्य है। उन्होंने आध्यात्मिकता को मूल्यों का स्रोत बताते हुए कहा कि शांति, एकाग्रता, ईमानदारी, धैर्यता, सहनशीलता आदि सद्गुण मानव जाती का श्रृंगार है। ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेन्द्र की बीके ममता बहन ने कहा कि कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से वर्तमान युवा पीढ़ी भटक रही है। चरित्रवान बनने के लिए युवा को इससे दूर रहना है। अपराध राजयोग का महत्व बताते हुए कहा कि राजयोग से एकाग्रता आएगी। इस अवसर पर नमिता वर्मा व्याख्याता उक्षमा सूर्यवंशी व्याख्याता केआईटी केके. गुप्ता रजिस्टार ममता बहन, मधु भाई, भगत भाई, मनोज भाई सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

Tuesday, 8 April 2014

शिव परमात्मा इस धरा पवर आ चुके है

Jyotirlinga

वर्तमान समय धरती की दशा

वर्तमान समय चारों और अत्याचार,भ्रष्टाचार,असत्य,हिंसा और अश्लीलता का बोलबाला है । अधर्म अपनी चरम सीमा पर है और पाप का घडा भर  चुका है । हर मनुष्य दु:खी और अशांत है । काम क्रोध,लोभ, मोह और अहंकार के वशीभूत मानव के कृत्यों से आज सारी धरती जल रही हैं । यही वह समय है जब स्वयं परमात्मा को बुराई और अधर्म का विनाश कार अच्छाई और सतधर्म की फिर संस्थापना करने हेतु इस धरती पर आना पडता है । सभी धर्म का यही मानना है कि जब भी अधर्म बढता हैं तब परमात्मा को इस धरती पर आना पडता है । वर्तमान समय हम युग परिवर्तन काल से गुजर रहे हैं जब कलियुग की समाप्ति  और सतयुग का आरंभ होता है । इस पावन बेला को संगमयुग कहा जाता है । यही समय है जब स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित होते है और मनुष्यात्माओं को पावन बनाकर सतयुग की पुनस्र्थापना करते है।

शिव परमात्मा इस धरा पवर आ चुके है
 
यश खुशखबरी हम आपको बताना चाहते है कि परमपिता इस धरती पर अवतरित हो चुके है । इस बात को शायद आप असानी से न मानें परंतु यह सत्य है कि इस पुरानी पतित दुनिया को फिर से पावन बनाने के लिए स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित हो चुके है । सर्वसर्व शक्तीवान परमात्मा महान भारत देश के राजस्थान स्थित आबु पर्वत पर अवतरित हो चुके है और प्रजापिता ब्रम्ह बाबा के तन के माध्यम से गुप्त रिती से अपना अलौकिक कार्य कर रहे है । परमात्मा जिन्हे ईश्वर,भगवान,अल्लाह,गॉड आदि नामों से हम जानते है,निराकार ज्योतिबिंदु रुप है । वे विश्व की सभी आत्माओं के परमपिता हैं । परमात्मा के आदेशनुसार यह शुभ संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।

शिव परमात्मा क्या करने आए है ?
दुखहर्ता – सुखकर्ता परमात्मा आए हैं विश्व की सभी दु:खी आत्माओं को दु:खों से मुक्त करने,इस पुरानी पतित कलियुगी सृष्टी को फिर से नई पावन सतयुगी सृष्टी बनाने और विकारी मनुष्यों को फिर से श्रेष्ठाचारी देवता बनाने । परमपिता परमात्मा इस समय विश्व की सभी आत्माओं को पावन बनाकर फिर से अपने घर ब्रम्हलोक ले जाने आए हें । परमात्मा ज्ञान के सागर हैं जो वर्तमान समय हम आत्माओं को आध्यात्मिक ज्ञान औ रसहज राजयोग की शिक्षा दे रहे है । सहज राजयोग एक उसी ध्यान साधना है जिससे आत्मा के सभी पाप समाप्त हो जाते है और आत्मा फिर सेपावन सतोप्रधान बन जाती है । राजयोग के माध्यम से मुनुष्यात्मा फिर से देवात्मा बन जाती है । इस योग का अभ्यास कोई भी मनुष्य बडी आसानी से कर सकता है ।

शिव परमात्मा आ चुके है


Jyotirlinga

शिव परमात्मा आ चुके है


वर्तमान समय धरती की दशा
वर्तमान समय चारों और अत्याचार,भ्रष्टाचार,असत्य,हिंसा और अश्लीलता का बोलबाला है । अधर्म अपनी चरम सीमा पर है और पाप का घडा भर  चुका है । हर मनुष्य दु:खी और अशांत है । काम क्रोध,लोभ, मोह और अहंकार के वशीभूत मानव के कृत्यों से आज सारी धरती जल रही हैं । यही वह समय है जब स्वयं परमात्मा को बुराई और अधर्म का विनाश कार अच्छाई और सतधर्म की फिर संस्थापना करने हेतु इस धरती पर आना पडता है । सभी धर्म का यही मानना है कि जब भी अधर्म बढता हैं तब परमात्मा को इस धरती पर आना पडता है । वर्तमान समय हम युग परिवर्तन काल से गुजर रहे हैं जब कलियुग की समाप्ति  और सतयुग का आरंभ होता है । इस पावन बेला को संगमयुग कहा जाता है । यही समय है जब स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित होते है और मनुष्यात्माओं को पावन बनाकर सतयुग की पुनस्र्थापना करते है।

शिव परमात्मा इस धरा पवर आ चुके है
यश खुशखबरी हम आपको बताना चाहते है कि परमपिता इस धरती पर अवतरित हो चुके है । इस बात को शायद आप असानी से न मानें परंतु यह सत्य है कि इस पुरानी पतित दुनिया को फिर से पावन बनाने के लिए स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित हो चुके है । सर्वसर्व शक्तीवान परमात्मा महान भारत देश के राजस्थान स्थित आबु पर्वत पर अवतरित हो चुके है और प्रजापिता ब्रम्ह बाबा के तन के माध्यम से गुप्त रिती से अपना अलौकिक कार्य कर रहे है । परमात्मा जिन्हे ईश्वर,भगवान,अल्लाह,गॉड आदि नामों से हम जानते है,निराकार ज्योतिबिंदु रुप है । वे विश्व की सभी आत्माओं के परमपिता हैं । परमात्मा के आदेशनुसार यह शुभ संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।

शिव परमात्मा क्या करने आए है ?
दुखहर्ता – सुखकर्ता परमात्मा आए हैं विश्व की सभी दु:खी आत्माओं को दु:खों से मुक्त करने,इस पुरानी पतित कलियुगी सृष्टी को फिर से नई पावन सतयुगी सृष्टी बनाने और विकारी मनुष्यों को फिर से श्रेष्ठाचारी देवता बनाने । परमपिता परमात्मा इस समय विश्व की सभी आत्माओं को पावन बनाकर फिर से अपने घर ब्रम्हलोक ले जाने आए हें । परमात्मा ज्ञान के सागर हैं जो वर्तमान समय हम आत्माओं को आध्यात्मिक ज्ञान औ रसहज राजयोग की शिक्षा दे रहे है । सहज राजयोग एक उसी ध्यान साधना है जिससे आत्मा के सभी पाप समाप्त हो जाते है और आत्मा फिर सेपावन सतोप्रधान बन जाती है । राजयोग के माध्यम से मुनुष्यात्मा फिर से देवात्मा बन जाती है । इस योग का अभ्यास कोई भी मनुष्य बडी आसानी से कर सकता है ।

परमपिता इस धरती पर अवतरित हो चुके हैं

ब्रम्हकुमारीज द्वारा नई सतयुगी सृष्टि की स्थापना आज भी परमात्मा से मिल सकते हैं, वर्तमान समय धरती की दशा, परमात्मा इस धरा पर आ चुके हैं, परमात्मा क्या करने आएं हैं, इन्हीं बिन्दुओं पर आधारित प्रदर्शनी के माध्यम से चरित्र निर्माण करने के बारे में आध्यात्मिक जानकारी दी गयी।यह खुशखबरी बताना चाहते हैं कि परमपिता इस धरती पर अवतरित हो चुके हैं। इस बात को शायद आप आसानी से न मानें परंतु यह सत्य है कि इस पुरानी पवित्र दुनिया को फिर से पावन बनाने के लिए स्वयं परमात्मा इस धरा पर अवतरित हो चुके हैं। सर्वशक्तिमान परमात्मा महान भारत देश के राजस्थान स्थित आबू पर्वत पर अवतरित हो चुके हैं और प्रजापति ब्रम्हा बाबा के तन के माध्यम से गुप्त रीति से अपना अलौकिक कार्य कर रहे हैं।

Sunday, 23 March 2014

स्वयं पर नियंत्रण करने वाला ही जीवन में आगे बढ़ता है: भगवान भाई

स्वयं पर नियंत्रण करने वाला ही जीवन में आगे बढ़ता है: भगवान भाई

Bhaskar News Network | Mar 14, 2014, 03:50AM IST
Email Print Comment
भास्कर न्यूज - करनाल
जीवन में वही व्यक्ति आगे बढ़ पाता है और पद प्रतिष्ठा प्राप्त करता है जिसने स्वयं पर नियंत्रण कर लिया हो। अन्यथा की स्थिति में व्यक्ति आजीवन पर भटकाव का सामना करता है। गुरुवार को सदर बाजार स्थित शिव स्मृति भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू से आए ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने यह बात कही। वह राजयोग पर बोल रहे थे। भगवान भाई ने कहा कि राजा वही है जिसने स्वयं को जीत लिया है। स्वयं अर्थात कर्मेंद्रियां पर जिसका नियंत्रण है। जिसकी आत्मा पवित्र है और जो नकारात्मक विचारों को सकारात्मक दिशा में परिवर्तित करके अपनी ऊर्जा का सही प्रयोग कर सके। उन्होंने उपस्थित साधकों को राजयोग का अभ्यास भी कराया। ब्रह्मकुमारी किरण ने मुरली सुनाई और साधकों को नियमित आश्रम पहुंचकर आध्यात्मिक सुख प्राप्ति के लिए प्रेरित किया।

सहनशीलता का महत्व













सहनशीलता का महत्व 

जब मैं अंदर से शान्त हँू तो ही सहनशक्ति की गुंजाईश है। जहाँ प्यार है वहाँ खुलापन है, जहाँ खुलापन है वहाँ सहनशीलता के लिए स्थान है। कहा जाता है कि सहनशील व्यक्ति कमजोर होते हैं जबकि सबसे महान व्यक्ति अपनी सहनशीलता से ही जाने जाते हैं। सहनशीलता एक वॉटर टैन्क के समान है। हरेक का अपना वॉटर टैन्क है और वह उसे अपनी धैर्यता के पानी से भरने का जिम्मेवार है। धैर्यता के इस पानी से जब वॉटर टैन्क ओवरफ्लो हो जाता है तो सहनशक्ति भी अधिक हो जाती है। ज्यादातर लोग यह सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि वे सही हैं और दूसरे गलत हैं। एक सहनशील व्यक्ति को कभी भी कुछ भी साबित करने की आवश्यकता नहीं है। एक पुरानी कहावत है कि सच्चाई हमेशा बाहर आ जाती है। अगर मैं ऐसा समझता हँू तो ये भी स्वीकार करूंगा कि दूसरे भी सही हैं। अत: मुझे अपनी सोच को दूसरों के प्रति बदलना चाहिए और उनके प्रति ज्यादा स्नेही, दयालू और समझदार होना चाहिए।

सहनशक्ति का आधार बनावटी बातों से परे जाना है। हम अपने बुरे अनुभवों के लिए दूसरों को दोष देते हैं जबकि हमें अपने अंदर झांक कर स्वयं को जानना होता है। मैं क्रोधी हँू, जब मैं यह स्वीकार कर लेती हँू तो मैं सहनशील हँू और तभी से सब बातें बदलने लगती है।
मुझे नि:स्वार्थ दूसरों की आवश्यकताओं के प्रति ध्यान देना चाहिए तभी मैं सब बातों को संभाल सकती हँू। हम प्राय: कहते है कि मुझे समझने की जरूरत है परन्तु मुझे कहना चाहिए कि मुझे दूसरों को समझने की आवश्यकता है। यह कहना बंद करो, वो बदले, बल्कि मुझे स्वयं को बदलने की जरूरत है। ऐसी सोच से धैर्य, शान्ति और परिपक्वता का विकास होता है। आध्यात्मिक सहनशीलता से ही ऐसी बुद्धिमत्ता का विकास होता है जिसे आप पुस्तकों से प्राप्त नहीं कर सकते। सहनशील व्यक्ति, विषम परिस्थितियों को शान्तिपूर्ण तरीके से हल कर लेते हैं। जब कोई मेरा अपमान करता है तो सहनशक्ति मुझे स्थिर और शीतल रहने की शक्ति प्रदान करती है। मुझे रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं पड़ती। अपितु, मुझे मुस्कुराते हुए अपने स्वमान में रहना होता है जो मुझे परिस्थितियों से परे ले जाने में सहायक होती हैं। सहनशील व्यक्ति सभी को अपने साथ लेकर चलते है, तालमेल बिठाते और परिस्थितियों का सामना करते हैं। वे संसार में होने वाली घटनाओं को अपने ऊपर उठने का एक अवसर मानते हैं। ये सहनशक्ति, आंतरिक शक्ति एवं अखंडता से आती है। सहनशक्ति दूसरों के प्रति उदार और खुला होने का अनुभव मात्र है। जब आप ये देखते हैं कि आपके संबंध और ताल्लुकात अच्छे हैं तो आप विशेष रूप से सहनशक्ति का उपयोग करते हैं। आध्यात्मिक शक्ति इस समझ से आती है कि आप कौन हैं, और आप मूल्यों के आधार पर खड़े हुए हैं और आप में सत्यता है, चाहे चारों ओर की परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
खुले, प्यार भरे और उदार हृदय द्वारा मुझमें समाने की शक्ति आती है। समाने, सहन करने से शान्ति की स्थिति से विकट परिस्थितियाँ भी आसान हो जाती हैं। सहनशीलता हमारा आंतरिक भोजन है। यदि मैं कहता हँू कि मुझे सहन करना पड़ेगा, इसका अर्थ है कि वास्तव में मुझमें सहनशक्ति नहीं हैं। जब मैं किसी स्थिति, परिस्थिति और व्यक्ति से प्यार का व्यवहार करता हँू तो मेरे में सहन करने की कोई फीलिंग नहीं होती।
सहनशील व्यक्ति ईंट की दीवार के समान होता है। उनका किसी से कितना भी टकराव हो फिर भी वे मजबूत, सुरक्षित और सर्वस्नेही रहते हैं और यह सब समाने और स्वीकार करने से होता है। एक पेपर टावल पानी को सोखने और समाने की शक्ति रखता है। बाग और खेत मौसम को सहन करने की क्षमता रखते हंै। क्या हम इन सबको सहन करते हुए मुस्कुराते हुए कह सकते हैं कि नि:संदेह, हाँ हम एकरस स्थिति में रह सकते हैं। विल पावर व दृढ़ता की शक्ति से हम पहाड़ों को भी पार कर सकते हैं।
हम सब जीवंत मानव वृक्ष हैं, जो चारों सीजन से गुजरते हैं, प्रत्येक की सहन करने की शक्ति भिन्न हैं। आंतरिक शक्ति समझदारी से आती है, लेकिन जब मैं साक्षी होकर देखता हँू तो मुझे लगता है कि मैं सहन नहीं कर रहा हँू परन्तु मैं बड़े और उदार दिल से दूसरों को स्वीकार कर रहा हँू और मेरी ओर आने वाली सब बातों को मैं समा रहा हँू। जब मैं सागर के समान बनता हँू तो आने वाली सभी बातों को खुली बाहों से अपने में समा लेता हँू फिर मेरा जीवन सुखमय, सहज हो जाता है और संबंध खुशनुमा हो जाते हैं। जब मैं उसका विरोध करता हँू तो समस्याएं पैदा हो जाती हैं और बढ़ भी जाती है। जब मैं गहराई से सोचता हँू कि सहनशीलता मेरा पुराना साथी है और धैर्य मेरा मित्र है, तो ये दोनों सारा दिन मेरे सभी पलों में मेरे साये के समान रहते है और जहाँ मैं जाता हँू वहाँ ये मेरे साथ जाते है।
सहनशीलता एक डांस की तरह है जिसमें हर समय सही काम अंदर-बाहर करना होता है। मैं हर एक बात को किस प्रकार सहन करता हूँ और कैसा संबंध रखता हूँ इसके लिए हर क्षण डांस टेक्निक की मेरे जीवन में आवश्यकता होती है, कभी जल्दी-जल्दी तो कभी धीरे-धीरे डांस करना पड़ता है।
फूल कांटों में रहते हुए भी हमेशा खिलते हैं, इसी प्रकार मुझे इस संसार में रहते हुए भी मेरे चारों ओर के लोगों को किस प्रकार से रेस्पाण्ड करना है और उन्हें स्वीकार वा एडजेस्ट करना है यह सहनशीलता का लक्षण है इसलिए सहनशीलता यह एक शक्ति है न कि कमजोरी। यह तूफान में भी वीरान है और गुफा के अंदर अंधेरे में रोशनी है। सहनशक्ति से मुझ में और शक्ति अनुभव होती है। हर अनुभव मेरे जीवन का अमूल्य क्षण है।
कभी कभी मुझे और उदासीनता अनुभव होती है जो दोनों ही निगेटिव क्वालिटीज़ हैं। अगर हम सहनशील नहीं हैं तो हम अपने को खाली अनुभव करते हैं। हमारे में सहनशक्ति नहीं है तो हम दूसरों को दोष देना और रिएक्ट करना शुरू कर देते हैं और जब हम स्वीकार करना शुरू कर देते और स्वयं को शक्तियों से भरपूर कर लेते हैं तो हमारी सहनशीलता पुन: बढ़ जाती है। कठिन परिस्थितियां हमारे लिए दर्पण के समान हैं जिसमें हम अपना वास्तविक रूप देखते हैं। मेरी जिम्मेवारी यथा सम्भव सर्वोत्तम तरीके से रेसपाण्ड करने की है। एक फलों से लदे हुए वृक्ष की कल्पना करो जिस पर एक बच्चा फल लेने के लिए पत्थर फेंक रहा है। वृक्ष उस लड़के से व्यथित नहीं होता है परन्तु किसी भी तरह से उसे फल देता है। हमें ऐसा ही सहनशील बनना है जिससे हमारा जीवन निश्चित रूप से खुशनुमा हो जायेगा। जहाँ स्नेह और प्यार है वहाँ सहनशक्ति स्वत: आती है।
योग के समय कुछ बातें गहराई से सोचने की हैं जिससे हमारी सहनशक्ति बढ़े…
सहनशीलता एक सहमति है…
सहनशक्ति से जीवन में आन्तरिक शक्ति आती है….
सहनशक्ति से जीवन में शान्ति आती है
सहनशक्ति से जीवन में खुलापन आता है
सहनशक्ति से संबंधों में सामंजस्य आता है
सहनशक्ति से स्वयं में, दूसरों में और वातावरण में शक्ति आती है
सहनशील व्यक्ति यह नहीं समझता कि मैं स्वीकार कर रहा हूँ ।
सहनशील व्यक्ति के मित्र अधिक होते हैं क्योंकि वे उसके सानिध्य में स्वयं को सुरक्षित अनुभव करते हैं। सहनशक्ति और रहम साथ-साथ चलते हैं, ये तीनों अच्छे दोस्त हैं और एक दूसरे के प्रति वफादार हैं। सहनशक्ति का अर्थ है मैं जिम्मेवार हूँ।