Friday, 26 May 2017

जगाधरी (हरियाणा) – में सरस्वती पब्लिक स्कूल

जगाधरी  (हरियाणा) में सरस्वती पब्लिक स्कूल  में नैतिक शिक्षा का जीवन में   पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक शिक्षा जीवन में महत्व   
प्रिंसिपल श्री दीपक सिंघला  
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
भगवान् भाई ने कहा की  नैतिक मूल्यों की कमी यही व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुसरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान व अन्य बातों के लिए प्रेरणा देने की आवश्यकता है। ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बन्धनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही शिक्षा है। उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त समाज के लिए संस्कारित शिक्षा जरूरी है।

है। 

जगाधरी (हरियाणा) – में सनातन धर्म सीनियर सेकण्डरी

जगाधरी  (हरियाणा) में सनातन धर्म सीनियर सेकण्डरी स्कूल  में नैतिक शिक्षा चरित्र निर्माण  पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक शिक्षा चरित्र निर्माण 
सहायक प्रिंसिपल श्रीमती संध्या गर्ग
श्रीमति---जगधिश्री गुप्ता सीनियर शिक्षिका   
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि पढाई  में आपकी चाहे कितनी भी दिलचस्पी हो या पढने का जूनून हो परन्तु परीक्षा के वक्त अधिकांश छात्र तनाव (Stress) की स्थिति में आ ही जाते है. परीक्षा का थोड़ा बहुत तनाव तो Student को पढने के लिए प्रेरित करता है लेकिन इस तनाव की अधिकता आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है. उन्होंने कहा कि कई छात्र एग्जाम के समय अपने पढाई के टाइम को बहुत बढ़ा देते है और कुछ अच्छे बच्चे और अधिक नंबर लाने के चक्कर में दिन भर किताबो से चिपके रहते है. ऐसी स्थिति का परिणाम यह होता है की Student परीक्षा के दौरान तो Stress में रहता ही है, साथ ही वह Result आने तक भी चिंता में डूबा रहता है. किसी Student के लिए यह सब ठीक नहीं है. परीक्षा से होने वाले तनाव के कारण भय व डर की स्थिति उत्पन्न होती है जिसे एग्जाम फोबिया (Exam Phobia) कहा जाता है. ऐसी Situation में स्टूडेंट को कड़ी व पूरी मेहनत करने के बावजूद भी अनुकूल परिणाम नहीं मिल पाता और वह छात्र अगर high marks लाने वाला होता है तो उसके marks बहुत ही कम आते है. जो उसके Future को अन्धकार में ले जा सकता है. इसलिए आपके लिए यह जरुरी है की इस तनाव को खुद पर हावी न होने दे और इससे बचे  अभिभावकों (Perents) से बेहतर परिणाम लाने का दवाब होना भगवान् भाई ने कहा कि वर्तमान में विद्यर्थी के तनाव का एक यह भी कारण है कि  Perents का अपने बच्चे पर अधिक marks लाने का माँ बाप का दबाव डालना, जो लगभग हर स्टूडेंट के तनाव का कारण बनता है. हर माता पिता यह चाहते है की उनका बच्चा बहुत अच्छे marks लाये और उनका नाम रोशन करे. अच्छे marks से उसे अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल जायेगा या वो उसे कोई कोर्स कराये जिससे उसका भविष्य उज्ज्वल बने. इस तरह का दबाव बार बार डालने से स्टूडेंट पर बहुत ज्यादा marks लाने का बोझ पड़ जाता है. जो उसको तनाव में धकेल देता है. कई छात्र पूरे सालभर मौज मस्ती करते है और जब परीक्षा की घडी आती है उस समय बहुत परेशान हो जाते है. वे परीक्षा के दिनों से कुछ समय पूर्व पढ़ना आरम्भ करते है जिससे उनको अपनी पढाई एक चट्टान नजर आती है. पढाई करने का दबाव उनको मानसिक तौर पर बीमार बनाने लगता है.
 उन्हों ने बताया कि पूरे सालभर थोड़ा थोड़ा भी पढता है वह परिक्षा के समय चिंता से मुक्त रहता है वही उन छात्रो को इस समय बहुत कठिनाई होती है जिन्होंने पूरे साल कुछ भी पढ़ा नहीं होता. इसलिए Exam के लिए पूरी तरह Prepare न होना Students में तनाव का Reason होता है.यह दबाव हर उस छात्र को होता है जिसको अच्छे नंबर लाने होते है. आपने 3 इडियट्स का यह डायलॉग जरुर सुना होगा की खुद के Fail होने पर उतना दुःख नहीं होता है जितना दुःख अपने Best दोस्त के प्रथम आने पर होता है”. यह मानवीय प्रकृति है जो बिल्कुल सच है. अपनी Class में सबसे ज्यादा नंबर लाना या अपने शहर में सबसे ज्यदा marks लाना. मेरिट लिस्ट में खुद को शामिल करना. यह वह दबाव होता है जो स्टूडेंट खुद में लेता है.

अच्छे मार्क्स लाने का दबाव भी छात्र को तनाव में डालता है.पूरे साल आप पढाई करते है और फिर आपको अपना पूरे साल का Report Card देना होता है जो की Exam के रूप में आपके सामने आता है. जब परीक्षा पूरी हो जाती है तो आपको Free Time मिलता है.इस समय उन स्टूडेंट्स को कुछ भी Problem नहीं होती जिन्होने पूरे आत्मविश्वास और लगन से परीक्षा दी होती है लेकिन जिस छात्र ने अच्छी तरह से पढ़कर और पूरी लगन से एग्जाम नहीं दिए होते है या जिसको अच्छा रिजल्ट आने का कॉन्फिडेंस नहीं होता वे छात्र इस समय बहुत परेशान रहते है और वे Stress की चपेट में आते है.चाहे परीक्षा के तैयारी का समय हो, परीक्षा का वक्त हो या उसके बाद रिजल्ट के इन्तजार का माहौल हो. इस Stress से बचना बहुत जरुरी है. इसलिए रिलैक्स स्टडी से ही अच्छे परिणाम की उम्मीद की जा सकती है. Relaxed रहे और Relaxed Study करे.
प्रोग्राम के अंत में उप प्रिंसिपल ने भी अपना उद्भोधन दिया गया



जगाधरी (हरियाणा) – में जनता सीनियर सेकंडरी

जगाधरी  (हरियाणा) में जनता सीनियर सेकंडरी स्कूल मुस्तफाबाद  में नैतिक शिक्षा पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक मूल्य    
प्रिंसिपल सरदार देवेन्द्र सिह
श्री धर्मवीर खुबड़ फिजिकल ट्रेनिंग इंस्पेक्टर   
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
भगवान भाई ने कहा  कि शैक्षणिक जगत में विद्यार्थियों के लिए नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों की कमी यही व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुसरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान व अन्य बातों के लिए प्रेरणा देने की आवश्यकता है। ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बन्धनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही शिक्षा है। उन्होंने कहा कि अपराध मुक्त समाज के लिए संस्कारित शिक्षा जरूरी है।

भगवान भाई ने कहा कि आज के ब"ो कल का भावी समाज हैं। अगर कल के भावी समाज को इन्हीं ब"ाों को नैतिक सद्गुणों की शिक्षा की आधार से चरित्रवान बनाए। तब समाज बेहतर बन सकता है। गुणवान व चरित्रवान ब"ो देश की स"ाी सम्पत्ति हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे गुणवान और चरित्रवान ब"ो देश और समाज के लिए कुछ रचनात्मक कार्य कर सकते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति को याद दिलाते हुए कहा कि प्राचीन संस्कृति आध्यात्मिकता की रही जिस कारण प्राचीन मानव भी वंदनीय और पूजनीय रहा। उन्होंने बताया कि नैतिक शिक्षा से ही मानव के व्यवहार में निखार लाता है।

जगाधरी (हरियाणा) – में एस डी सीनियर सेकंडरी स्कूल

जगाधरी  (हरियाणा) में एस डी सीनियर सेकंडरी स्कूल  में नैतिक शिक्षा चरित्र निर्माण  पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय सेवाकेंद्र जगाधरी  (हरियाणा)
मुख्य वक्ता ---बी के भगवान् भाई माउंट आबू
विषय नैतिक शिक्षा चरित्र निर्माण 
प्रिंसिपल श्री सतीश गर्ग   
बी के उषा  बहन असंध हरियाणा  सेंटर प्रभारी
बी के सुषमा जगाधरी हरियाणा
बी के तेजस असंध हरियाणा
 इस अवसर पर  राजयोगी बी.के. भगवान भाई ने कहा कि गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा   भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मूल्यांकन,आचरण,अनुकरण,लेखन,व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार अथवा असत्य से ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दि

असंध (हरियाणा )---राजकीय कन्या

असंध (हरियाणा )---राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय  में नैतिक मूल्यों का जीवन महत्त्व पर कार्यक्रम
आयोजक स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र असंध  (हरियाणा )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –- नैतिक मूल्यों का जीवन में महत्व 
चेअरमन  श्रीमति सिमरनीत कोर  जी 
श्री मोतीलाल शास्त्री सस्कृत आध्यापक
बी के उषा  बहन स्थानीय ब्रह्माकुमारी  असंध  (हरियाणा )  
बी के तेजस भाई ,विजय शर्मा,महावीर भाई और सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया
कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मूल्यांकन,आचरण,अनुकरण,लेखन,व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार अथवा असत्य से ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।

भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया।